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Bilaspur News: किशोरों को एनीमिया से बचाने के लिए शिक्षकों को किया जागरूक
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झंडूता में आयरन फोलिक एसिड कार्यक्रम पर कार्यशाला, एचपीवी वैक्सीनेशन की भी दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता में स्कूलों के नोडल अध्यापकों के लिए साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंट कार्यक्रम पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल भारद्वाज ने की।
डॉ. अतुल भारद्वाज ने बताया कि भारत सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों में खून की कमी (एनीमिया) को रोकना और नियंत्रित करना है। इसके तहत 10 से 19 वर्ष के किशोरों को सप्ताह में एक बार आयरन फोलिक एसिड की गोली दी जाती है। साथ ही पेट के कीड़ों से बचाव के लिए साल में दो बार एल्बेंडाजोल की गोली देने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन फोलिक एसिड सिरप दिया जाता है। छह से 10 वर्ष के बच्चों के लिए गुलाबी रंग की गोली और 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए नीले रंग की गोली निर्धारित है। गर्भवती महिलाओं को लाल रंग की आयरन फोलिक एसिड की गोली दी जाती है।
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उन्होंने नोडल अध्यापकों से कहा कि स्कूली बच्चों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आयरन फोलिक एसिड की गोलियां देना सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार ने कार्यक्रम के महत्व की जानकारी दी। इस दौरान अध्यापकों को एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में भी जागरूक किया गया। कार्यशाला में स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता में स्कूलों के नोडल अध्यापकों के लिए साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंट कार्यक्रम पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल भारद्वाज ने की।
डॉ. अतुल भारद्वाज ने बताया कि भारत सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों में खून की कमी (एनीमिया) को रोकना और नियंत्रित करना है। इसके तहत 10 से 19 वर्ष के किशोरों को सप्ताह में एक बार आयरन फोलिक एसिड की गोली दी जाती है। साथ ही पेट के कीड़ों से बचाव के लिए साल में दो बार एल्बेंडाजोल की गोली देने का प्रावधान है।
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उन्होंने बताया कि छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन फोलिक एसिड सिरप दिया जाता है। छह से 10 वर्ष के बच्चों के लिए गुलाबी रंग की गोली और 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए नीले रंग की गोली निर्धारित है। गर्भवती महिलाओं को लाल रंग की आयरन फोलिक एसिड की गोली दी जाती है।
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उन्होंने नोडल अध्यापकों से कहा कि स्कूली बच्चों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आयरन फोलिक एसिड की गोलियां देना सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार ने कार्यक्रम के महत्व की जानकारी दी। इस दौरान अध्यापकों को एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में भी जागरूक किया गया। कार्यशाला में स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।