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Shimla News: बंदरों के हमले से मकान की छत से गिरी बुजुर्ग महिला, आईसीयू में भर्ती
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राजधानी के समिट्री क्षेत्र में रविवार सुबह 7:30 बजे की घटना, छत पर रखी टंकियां देखने गई थी सत्या देवी
बंदरों ने किया हमला, छत से नीचे आंगन में गिरी, अब आईजीएमसी में चल रहा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के समिट्री क्षेत्र में उत्पाती बंदरों के हमले से एक बुजुर्ग महिला अपने बहुमंजिला मकान की छत से नीचे गिर गई। गंभीर रूप से घायल महिला को आईजीएमसी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। ज्यादा खून बहने से महिला को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
63 वर्षीय सत्या देवी रविवार सुबह करीब 7:30 बजे मकान की छत पर रखी टंकियों में पानी देखने गई थी। यहां पर बंदरों का झुंड बैठा था जो सत्या देवी पर झपट पड़ा। इस हमले से सत्या देवी को संभलने का मौका नहीं मिला और वह छत से नीचे आंगन में गिर गई। पड़ोसियों ने उन्हें छत से गिरते देखा। पड़ोसियों के चीखने चिल्लाने पर घर के सदस्य बाहर निकले और घायल अवस्था में सत्या देवी को आईजीएमसी अस्पताल पहुंचाया। सत्या देवी की बेटी रजनी ने बताया कि छत से गिरने के कारण मां के छाती में गंभीर चोटें लगी हैं। काफी खून बह गया है। सांस लेने में परेशानी को देखते हुए सत्या देवी को आईसीयू में भर्ती किया गया है। पार्षद विनीत शर्मा सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और लोगों से घटना की जानकारी ली। पार्षद ने कहा कि इस क्षेत्र में बंदरों का भारी आतंक है। कुछ लोग घरों की छतों पर खाना रख देते हैं जिससे यहां बंदरों के झुंड दिन भर घूमते रहते हैं। कहा कि लोगों से बंदरों को रिहायशी इलाकों के बीच खाना न देने की अपील की है।
हर महीने बंदरों के काटने के दर्जनों मामले
शहर में हर महीने बंदरों के हमले और काटने के दर्जनों मामले आईजीएमसी समेत अन्य अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। शहर के मिडल बाजार, कुफ्टाधार में बंदरों के हमले से दो महिलाओं को जान तक गंवानी पड़ी थी। शहर के जाखू, संजौली, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला, बैनमोर, शांति विहार, समरहिल, चौड़ा मैदान क्षेत्र में बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक है। लोगों का कहना है कि बंदरों को पकड़ा जाए। इनकी नसबंदी भी की जाए। वन विभाग ने कई साल तक नसबंदी अभियान तो चलाया लेकिन इसके बावजूद शहर में बदंरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर में दो हजार से ज्यादा बंदर हैं।
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शहर में नसबंदी बंद, बंदर मचा रहे उत्पात
राजधानी में अब बंदरों की नसबंदी का काम भी बंद है। वन विभाग को नसबंदी के लिए सरकार से मिलने वाला बजट बंद होने के कारण बंदरों को पकड़ने का काम ठप पड़ा है। अब वन विभाग शिकायत पर भी बंदरों को नहीं पकड़ रहा है। विभाग का कहना है कि बंदर अब लावारिस पशुओं की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। ये वन विभाग में नहीं आते। इसका जिम्मा नगर निगम के पास है। उधर, नगर निगम का कहना है कि बंदरों से जुड़ी शिकायतें अभी वन विभाग ही देख रहा है। इनका जिम्मा नगर निगम को नहीं मिला है।
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बंदरों ने किया हमला, छत से नीचे आंगन में गिरी, अब आईजीएमसी में चल रहा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के समिट्री क्षेत्र में उत्पाती बंदरों के हमले से एक बुजुर्ग महिला अपने बहुमंजिला मकान की छत से नीचे गिर गई। गंभीर रूप से घायल महिला को आईजीएमसी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। ज्यादा खून बहने से महिला को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
63 वर्षीय सत्या देवी रविवार सुबह करीब 7:30 बजे मकान की छत पर रखी टंकियों में पानी देखने गई थी। यहां पर बंदरों का झुंड बैठा था जो सत्या देवी पर झपट पड़ा। इस हमले से सत्या देवी को संभलने का मौका नहीं मिला और वह छत से नीचे आंगन में गिर गई। पड़ोसियों ने उन्हें छत से गिरते देखा। पड़ोसियों के चीखने चिल्लाने पर घर के सदस्य बाहर निकले और घायल अवस्था में सत्या देवी को आईजीएमसी अस्पताल पहुंचाया। सत्या देवी की बेटी रजनी ने बताया कि छत से गिरने के कारण मां के छाती में गंभीर चोटें लगी हैं। काफी खून बह गया है। सांस लेने में परेशानी को देखते हुए सत्या देवी को आईसीयू में भर्ती किया गया है। पार्षद विनीत शर्मा सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और लोगों से घटना की जानकारी ली। पार्षद ने कहा कि इस क्षेत्र में बंदरों का भारी आतंक है। कुछ लोग घरों की छतों पर खाना रख देते हैं जिससे यहां बंदरों के झुंड दिन भर घूमते रहते हैं। कहा कि लोगों से बंदरों को रिहायशी इलाकों के बीच खाना न देने की अपील की है।
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हर महीने बंदरों के काटने के दर्जनों मामले
शहर में हर महीने बंदरों के हमले और काटने के दर्जनों मामले आईजीएमसी समेत अन्य अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। शहर के मिडल बाजार, कुफ्टाधार में बंदरों के हमले से दो महिलाओं को जान तक गंवानी पड़ी थी। शहर के जाखू, संजौली, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला, बैनमोर, शांति विहार, समरहिल, चौड़ा मैदान क्षेत्र में बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक है। लोगों का कहना है कि बंदरों को पकड़ा जाए। इनकी नसबंदी भी की जाए। वन विभाग ने कई साल तक नसबंदी अभियान तो चलाया लेकिन इसके बावजूद शहर में बदंरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर में दो हजार से ज्यादा बंदर हैं।
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शहर में नसबंदी बंद, बंदर मचा रहे उत्पात
राजधानी में अब बंदरों की नसबंदी का काम भी बंद है। वन विभाग को नसबंदी के लिए सरकार से मिलने वाला बजट बंद होने के कारण बंदरों को पकड़ने का काम ठप पड़ा है। अब वन विभाग शिकायत पर भी बंदरों को नहीं पकड़ रहा है। विभाग का कहना है कि बंदर अब लावारिस पशुओं की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। ये वन विभाग में नहीं आते। इसका जिम्मा नगर निगम के पास है। उधर, नगर निगम का कहना है कि बंदरों से जुड़ी शिकायतें अभी वन विभाग ही देख रहा है। इनका जिम्मा नगर निगम को नहीं मिला है।