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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu: Sea buckthorn to become a source of employment and business, not just a wild fruit.

कुल्लू: जंगली फल नहीं, रोजगार और कारोबार का जरिया बनेगा सीबकथॉर्न

Sat, 26 Sep 2026 11:52 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Sep 2026 11:52 AM IST
सार

 विशेषज्ञों ने इसके लिए प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। जीबी पंत हिमालयी संस्थान मौहल में राष्ट्रीय सेमिनार में सीबकथॉर्न के प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, जैव प्रौद्योगिकी, बाजार और व्यवसायीकरण की संभावनाओं पर चर्चा हुई। 

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Kullu: Sea buckthorn to become a source of employment and business, not just a wild fruit.
जंगली फल नहीं, रोजगार और कारोबार का जरिया बनेगा सीबकथॉर्न। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सीबकथॉर्न (छरमा) को केवल जंगली फल तक सीमित रखने के बजाय पोषण, औषधीय उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय रोजगार और टिकाऊ आजीविका का साधन बनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने इसके लिए प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। जीबी पंत हिमालयी संस्थान मौहल में राष्ट्रीय सेमिनार में सीबकथॉर्न के प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, जैव प्रौद्योगिकी, बाजार और व्यवसायीकरण की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विवि पालमपुर के पूर्व डीन डॉ. वाईएस धालीवाल ने कहा कि वर्तमान में करीब 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सीबकथॉर्न की खेती हो रही है।

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इसका क्षेत्र बढ़ाने के साथ किसानों और स्थानीय लोगों को इससे जोड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि यह आजीविका का मजबूत साधन बन सके। उन्होंने कहा कि छरमा के पत्तों, फलों और बीजों से तैयार होने वाले उत्पादों में वैल्यू एडिशन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। स्थानीय स्तर पर इन उत्पादों का प्रसंस्करण और विपणन बढ़ने से कारोबार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रोफेसर डॉ. रंजना वर्मा ने कहा कि सीबकथॉर्न में औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसके उत्पादों को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अब लोग सीबकथॉर्न से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण लेने भी पहुंच रहे हैं।
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स्थानीय उद्यमिता मॉडल भी रखा
कार्यक्रम में लाहौल-स्पीति के जाहलमान स्थित पालदेन लामो सहकारी के समुदाय आधारित वैल्यू एडिशन और व्यावसायीकरण मॉडल को भी प्रमुखता से रखा गया। इसके माध्यम से सीबकथॉर्न को स्थानीय उद्यमिता, रोजगार और आय के अवसरों से जोड़ने की संभावनाएं सामने आईं। तकनीकी सत्र में सीबकथॉर्न के पॉलीफेनॉल-फॉस्फोलिपिड कॉम्प्लेक्स, एंटीफ्रीज प्रोटीन, जैव-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग, एंटीऑक्सीडेंट एवं औषधीय गुणों पर शोध साझा किया गया। कुल्लू के बजौरा स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र से अभय शर्मा ने जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और ट्रांस-हिमालयी समुदायों की मजबूती में सीबकथॉर्न की भूमिका पर प्रस्तुति दी।

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