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भीषण अग्निकांड: 14 साल बाद एक बार फिर दहका मलाणा गांव, 150 लोग बेघर
Thu, 28 Oct 2021 11:22 AM IST
अरविन्द ठाकुर
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 28 Oct 2021 11:22 AM IST
सार
2006 में मलाणा गांव में लगी भीषण आग में 100 से अधिक घर राख जलकर राख हो गए थे।
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मलाणा गांव में धू-धूकर जले मकान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र में शुमार मलाणा गांव एक बार फिर भीषण अग्निकांड की भेंट चढ़ गया है। 14 साल बाद गांव के 16 मकान धू-धूकर जल उठे। कुल्लू जिले में पिछले 15 सालों में एक दर्जन से अधिक गांवों का नामोनिशान मिट गया है। इसमें ऐतिहासिक मलाणा गांव भी शामिल है। 14 साल बाद भड़की आग की चिंगारी से एक बार फिर मलाणावासियों की यादें ताजा हो गई हैं। आग से 150 लोग बेघर हो गए हैं।
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समुद्रतल से करीब आठ हजार से अधिक ऊंचाई पर बसे मलाणा गांव में सर्दी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। अग्निकांड से प्रभावित परिवारों के लिए ठंड में गुजर बसर करना एक चुनौती है। हालांकि, जिला प्रशासन ने प्रभावितों को राहत राशि दी है, लेकिन सब कुछ खो चुके लोगों के लिए यह नाकाफी है। कुल्लू में अभी तक मलाणा, मोहनी, शिल्हा, सोलंग, कोटला तथा निरमंड के जुआगी गांव की घटना ने जिलावासियों के साथ प्रदेश की जनता को झकझोर कर रख दिया था। पिछले दो दशक से जिले में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। देवी-देवताओं के मंदिर भी आग की भेंट चढ़ चुके हैं।
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पूरे-पूरे गांव के स्वाह होने के अलावा जिले में साल में 15 से 20 आग की घटनाएं होती हैं। पिछले सप्ताह मणिकर्ण घाटी के कालगा में 21 कमरों के तीन घर जल गए थे। आग की घटनाएं रोकने के लिए सरकार के प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। अभी तक हुए इन बड़े हादसों को रोकने के लिए प्रदेश सरकारें नाकाम साबित हुई हैं। इसके पीछे गांवों में सड़कें, पानी तथा अग्निशमन वाहन न होना मुख्य कारण है। मलाणा गांव में लगी आग पर समय पर काबू नहीं पाने के पीछे भी सड़क और पानी का अभाव माना जा रहा है।
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जिला कुल्लू में हुई आग की बड़ी घटनाएं
-2006 में मलाणा गांव में लगी भीषण आग में 100 से अधिक घर राख।
-2006 में मणिकर्ण के शिल्हा गांव में दर्जनों घर जले।
-2007 में बंजार के मोहनी में लगी आग में 90 घर व गोशालाएं जलीं।
-2007 में भुंतर में आधा दर्जन से अधिक दुकानें जलकर राख।
-2008 में मनाली का सोलंग गांव पूरी तरह से जल गया था।
-2009 में निरमंड के जुआगी गांव में 30 घर राख हो गए थे ।
-2015 में शांघड़ में दर्जनभर मकान, देवता शंगचूल का मंदिर जला।
-2015 में बंजार घाटी के कोटला गांव में 80 से अधिक घर जले।