फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   kotkhai gudiya rape and murder case school upgraded but no teaching staff

गुड़िया जैसा कांड न हो इसलिए अपग्रेड कर दिया स्कूल, पर बच्चों से खिलवाड़

Sun, 10 Jun 2018 01:18 PM IST
पंकज गांगटा, अमर उजाला, कोटखाई
पंकज गांगटा, अमर उजाला, कोटखाई Updated Sun, 10 Jun 2018 01:18 PM IST
विज्ञापन
kotkhai gudiya rape and murder case school upgraded but no teaching staff

कोटखाई के निकटवर्ती हुल्ली कस्बे से करीब 17 किलोमीटर ऊपर दुर्गम पहाड़ी चढ़कर टॉप पर है जराई हाईस्कूल। यह कोटखाई और ठियोग की सीमा पर ग्राम पंचायत कलींड में है। यहां से सामने वाली पहाड़ी पर वही दांदी जंगल नजर आता है, जहां गुड़िया कांड हुआ। लोगों की मांग पर इस कांड के बाद पिछली सरकार ने अपग्रेड कर इसे हाई स्कूल बनाया।

विज्ञापन


पहले दांदी जैसे जंगल का रास्ता पार कर नीचे देवगढ़ स्कूल जाना होता था। मगर इस साल बच्चे नौवीं कक्षा में भी यहीं दाखिल हो गए। स्कूल तो अपग्रेड कर दिया, पर पढ़ाने वाले नहीं हैं। 45 बच्चों की पढ़ाई का दारोमदार एक शारीरिक शिक्षक पर है।

विज्ञापन

kotkhai gudiya rape and murder case school upgraded but no teaching staff

मुख्याध्यापक मरीज हैं, पढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। हाल ही में आईं एक अन्य शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं। शुरू से स्कूल में टीजीटी मेडिकल, टीजीटी नॉन मेडिकल, शास्त्री, भाषा अध्यापक, कला अध्यापक समेत आधा दर्जन से ज्यादा पद खाली हैं। 

अमर उजाला ने इस स्कूल का जायजा लिया। हमारे संवाददाता बीते दिन कच्ची कीचड़वाली सड़क से करीब पौने 12 बजे राजकीय उच्च पाठशाला जराई पहुंचे तो देखा कि कुछ बच्चे सफाई अभियान में लगे हैं तो कुछ बरामदे में किताबें खोले बैठे हैं।

kotkhai gudiya rape and murder case school upgraded but no teaching staff

कोई गपशप में वक्त गुजार रहा है। यहां इन बच्चों को पढ़ाने कोई नहीं आ रहा। मुख्याध्यापक बेशक स्कूल में हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनको पैरालिसिज का अटैक पड़ा है तो वे महज पंद्रह मिनट से ज्यादा नहीं बोल पाते या पढ़ा पाते। उनको चलने और बोलने में दिक्कत है।

फिर भी अकेले वही हैं, जिनकी स्कूल में नियमित हाजिरी है। स्कूल में तैनात शारीरिक शिक्षक किसी विभागीय कार्य से बाहर हैं। ऐसे विभागीय कार्य हमेशा रहते हैं। बच्चे विवश हैं। कुछ बच्चों ने रोनी सी सूरत बनाकर कहा कि वे न तो स्कूल में पढ़ पा रहे हैं और न ही इसे छोड़ने की स्थिति में ही हैं।

मालूूम नहीं, उनके भविष्य का क्या होगा। जहां हाईस्कूल में करीब 10 शिक्षक होने चाहिए, वहीं यह पाठशाला शिक्षा में अव्वल होने की बात करने वाले हिमाचल में शिक्षा प्रणाली को आईना दिखा रही है।

विज्ञापन

स्कूल खोलकर सरकार ने किया मजाक

kotkhai gudiya rape and murder case school upgraded but no teaching staff

बच्चों के अभिभावक रामानंद शर्मा, गिरजानंद शर्मा, जगदीश, अंबादत्त शर्मा, नरेश आदि ने बताया कि वे शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए कई बार शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक से मिल चुके हैं।

दूर होने के कारण वे बच्चों को दूसरे स्कूलों में नहीं भेज सकते। सरकार ने स्कूल खोलकर गरीब लोगों के बच्चों के साथ मजाक किया है। एसएमसी के प्रधान राकेश वर्मा और कलींड पंचायत के उप प्रधान वासुदेव शर्मा ने भी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ पर चिंता जताई। 

सीएम बोले, जल्दी निकालेंगे समस्या का समाधान- अमर उजाला ने यह मामला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ध्यान में भी लाया। उन्होंने इसका जल्दी कोई समाधान निकालने की बात कही है। सीएम बोले कि जराई स्कूल की तरह ही कुछ और स्कूलों में भी यही हाल है। सरकार गंभीर कदम उठाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed