गुड़िया रेप और हत्याकांड में बड़ा खुलासा, ये निकला हत्यारोपी
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गुड़िया रेप और हत्याकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शिमला के कोटखाई में गुड़िया से दुराचार के बाद हत्या मामले में सीबीआई की ओर से गिरफ्तार पहला आरोपी मंडी-कांगड़ा जिले की सीमा पर स्थित बरोट का है।
इस आरोपी की पहचान अनिल उर्फ नीलू (25) के रूप में बताई जा रही है, जो लकड़ी की चिराई का काम करता है। सोमवार सुबह जांच एजेंसी सीबीआई इस छोटे कद के आरोपी नीलू को चेहरे पर नकाब डाले पुलिस के कड़े पहरे में उसी दांदी जंगल ले गई जहां गुड़िया से दुराचार के बाद हत्या की गई थी।
सीबीआई ने जंगल में उसे उन तमाम स्थानों पर घुमाया, जिनसे पूरे प्रकरण की कड़ियां जुड़ी हुई हैं।सोमवार सुबह करीब सात बजे आरोपी नीलू को लेकर सीबीआई पहले महासू क्षेत्र के बानकुफर पहुंची।
कई गाड़ियों में पहुंचा 50 से ज्यादा जवानों का सशस्त्र पुलिस बल
यहां पर पहले से ही कई गाड़ियों में पहुंचा 50 से ज्यादा जवानों का सशस्त्र पुलिस बल तैनात था। सीबीआई के जांच अधिकारियों ने गुड़िया का शव मिलने के स्थान, इसके निचले और ऊपर के तमाम क्षेत्रों के अलावा दांदी जंगल में शिव मंदिर के पास जहां चिरानी रहते थे, वहां का भी निरीक्षण किया।
आरोपी से मौका-ए-वारदात से संबंधित कई बातों पर पूछताछ होती रही। फिर टीम एक नेपाली मजदूर के डेरे पर पहुंची, जिसने उसकी शिनाख्त की। इसके बाद सीबीआई आरोपी को लेकर बानकुफर स्थित वन विश्राम गृह गई। सीबीआई ने आरोपी को करीब सवा नौ बजे तक वहां रखा, फिर उसे कड़े पहरे में शिमला लाया गया।
आरोपी को देखते नेपाली मजदूर बोला, चिरानी नीलू है ये
आरोपी के साथ सीबीआई की चार गाड़ियों का काफिला चल रहा था। जंगल में कई स्थानों की शिनाख्त के बाद कुछ दूरी पर सीबीआई की गाड़ी एक नेपाली मजदूर के डेरे पर रुकी।
कडे़ पहरे के बीच नेपाली प्रेम बहादुर से आरोपी की पहचान करवाई गई। नेपाली मजदूर ने सीबीआई को देखते ही बोला- ये चिरानी नीलू है। घटना के दिन आरोपी इस नेपाली के डेरे में आया था।
नीलू ही हो सकता है मुख्य आरोपी
सीबीआई ने आरोपी नीलू की भूमिका को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। सूत्रों का कहना है कि नीलू इस मामले का मुख्य आरोपी हो सकता है। हालांकि सीबीआई ने नीलू की इस प्र्रकरण में भूमिका पर कुछ भी साफ करने से परहेज किया है।
सीबीआई ने यह भी सार्वजनिक नहीं किया है कि गुड़िया के साथ दुराचार शव बरामदगी वाले स्थान पर हुआ या कहीं और। बहरहाल माना जा रहा है कि 25 अप्रैल को हाईकोर्ट में सीबीआई इस मामले से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट पेश कर स्थिति साफ कर सकती है।
क्या है पूरा मामला
छह जुलाई 2017 को गुड़िया का शव दांदी जंगल में मिला था। इसके बाद पुलिस ने दुराचार और हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस ने छह आरोपियों को पकड़कर इस मामले को सुलझा लेने का दावा किया।
जुर्म कबूल करवाने के लिए एक आरोपी सूरज को थाने में ही पीट-पीटकर मार डाला गया। बाद में जनाक्रोश भड़का तो जांच सीबीआई को देनी पड़ी। सीबीआई ने सूरज हत्याकांड में आईजी, एसपी समेत आठ पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा बनाया।
पुलिस ने जिन आरोपियों को गुड़िया के कत्ल और दुराचार के आरोप में पकड़ा, सीबीआई ने उन्हें मुजरिम नहीं माना। अब गुड़िया हत्याकांड में अनिल उर्फ नीलू नाम के शख्स को पकड़ा है।
आरोपी का नकाब हटाने पर अड़े रहे लोग
हम सीबीआई को शाबाशी देना चाहते हैं, हमें मिलने दिया जाए। साथ ही लोग आरोपी का नकाब हटाने को भी अड़े रहे। कुछ लोग तो आरोपी को देखकर अपना आपा भी खोने लग गए थे। लोगों ने सीबीआई की गाडि़यों का ही घेराव कर दिया।
एक अधिकारी ने बाहर उतर कर लोगों को समझाया
इस बीच सीबीआई के एक अधिकारी ने बाहर उतर कर लोगों को समझाया। उसके बाद सीबीआई की गाड़ी को लोगों ने घटना स्थल से महासू की ओर जाने दिया।
स्थानीय निवासी अनंतराम नेगी के साथ गांव के अन्य लोग जुटे। जिन पांच युवकों को पहले पुलिस ने आरोपी बनाया था, वे नेगी के पास ही काम करते थे। एक सह आरोपी भी इसी गांव का युवक बनाया गया था।
बाद में सीबीआई ने पुलिस की कहानी को गलत ठहराया। हलाइलावासियों में गांव के कई पुरुष और महिलाएं भी शामिल थीं। मगर पुलिस ने इन सभी लोगों को सीबीआई से मिलने नहीं दिया।