गुड़िया रेप हत्याकांड: सीबीआई टीम को अब काले चश्मे वाले चिरानी की तलाश
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कोटखाई के गुड़िया दुराचार हत्या मामले में अब सीबीआई को काले चश्मे वाले चिरानी की भी सरगर्मी से तलाश है। केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी इस चिरानी के फोटो लेकर दांदी जंगल के आसपास के क्षेत्रों में लोगों को दिखा चुकी है और उनसे पूछ चुकी है कि क्या किसी ने इस आदमी को कहीं देखा तो नहीं है।
दरअसल सीबीआई गुड़िया मामले से इस दूसरे चिरानी का भी गहरा संबंध मान रही है। हालांकि, अभी तक ये पहेली बनी हुई है कि आरोपी की उसने अपराध में मदद की है या फिर उसे गवाह बनाने की तैयारी चल रही है। पिछले कई दिनों से सीबीआई के लोग गुड़िया दुराचार और हत्या मामले के आरोपी अनिल कुमार उर्फ नीलू की जहां क्षेत्र के कई लोगों से शिनाख्त करवाते रहे। उसका फोटो दिखाकर लोगों से पूछताछ करते रहे, वहीं काला चश्मा लगाने वाले चिरानी के बारे में भी वे पूछताछ कर उसका फोटो लोगों को दिखाते रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो ये चिरानी आरोपी बनाए गए चिरानी अनिल कुमार उर्फ नीलू के साथ काम करता था। ये उसके बारे में बहुत सी जानकारियां रखता है। गुड़िया कांड में भी इस दूसरे चिरानी की कोई भूमिका है या फिर इसे गवाह बनाने की तैयारी चल रही है। इस पर सीबीआई से स्थिति साफ नहीं हो पाई है। सीबीआई एक अन्य चिरानी को पहले से ही आरोपी चिरानी के खिलाफ गवाह बना चुकी है। ये काले चश्मे वाला कोई तीसरा चिरानी ही बताया जा रहा है।
सीबीआई ने लौटाए गांववालों के बिस्तर
बानकुफर में रह रही सीबीआई की टीम ने गांववालों से ही सोने के लिए बिस्तर लिए थे, क्योंकि जांच अधिकारियों और कर्मचारियों के ज्यादा होने की स्थिति में ये बिस्तर इस्तेमाल किए जाते थे।
सीबीआई के अनुरोध पर गांववालों ने इन्हें सीबीआई को दिया था। सीबीआई के अधिकारी और कर्मचारी वन विश्राम गृह बानकुफर में काफी लंबे वक्त तक रहे।
सीबीआई ने आरोपी नीलू की मां के भी ब्लड सैंपल लिए- सीबीआई ने आरोपी अनिल कुमार उर्फ नीलू की मां के भी ब्लड सैंपल लिए हैं। मां के नमूने से लिए गए डीएनए का भी सीन ऑफ क्राइम के पास से मिले डीएनए से मिलान किया गया है। इसी मिलान के बाद गुड़िया मामले का पटाक्षेप हुआ है।
नौ महीने से सलाखों के पीछे हैं गुड़िया मामले के दो आरोपी
प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे चिरानी अनिल उर्फ नीलू की गिरफ्तारी कर सीबीआई अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन गुड़िया कांड की जांच के लिए बनी हिमाचल पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा गिरफ्तार किए गए लोकजन और दीपक को लेकर सीबीआई अब तक असमंजस में है। यही कारण है कि सीबीआई न तो दोनों को क्लीन चिट दे सकी है और न ही उनकी मामले में भूमिका स्पष्ट कर सकी है।
जाहिर है सीबीआई की चुप्पी के चलते पिछले नौ महीने से दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं। उल्लेखनीय है कि 4 जुलाई 2017 को गुड़िया का अर्धनग्न शव दांदी के जंगल से बरामद किया गया था। मामले की जांच के लिए हिमाचल पुलिस के तत्कालीन आईजी जैदी जहूर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया।
इस एसआईटी ने लोकजन और दीपक समेत कुल छह युवकों को मामले में आरोपी बताकर गिरफ्तार कर लिया था। इसी दौरान लॉकअप में सूरज नाम के शख्स की हत्या हो गई जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई जांच के दौरान आरोपी आशीष चौहान, राजू और सुभाष को जमानत मिल गई। लेकिन लोकजन और दीपक अब भी कंडा जेल में हैं।
गुड़िया मामले में सीबीआई दोबारा करे जांच
कोटखाई गुड़िया हत्याकांड पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीबीआई से एक बार फिर मामले की जांच करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर सही में एक चिरानी ही गुड़िया का हत्यारा है तो इसके लिए सीबीआई बधाई की पात्र है।
लेकिन, अभी भी लोगों के दिलों में यह बात पूरी तरह नहीं उतर रही है कि एक साधारण चिरानी को बचाने के लिए प्रदेश पुलिस के आईजी समेत पुलिस के नौ अधिकारियों को जेल जाना पड़ा। एक चिरानी को बचाने के लिए पुलिस हवालात में बंद एक गवाह की हत्या करवाई गई।
प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। ऐसे में कई सवाल ऐसे हैं, जिनसे लगता है कि असली गुनहगार अब भी बच गया है। उन्होंने सीबीआई और सरकार से मांग की है कि इस प्रकरण में एक बार फिर से पूरी पड़ताल कर ली जाए।
इस मामले में प्रदेश पुलिस के प्रमुख अधिकारी पकड़े गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्होंने सभी प्रकार की गवाही के तथ्यों को इस प्रकार से समाप्त कर दिया है कि असली अपराधी को पकड़ा नहीं जा सके। पूरे देश में छोटे बच्चों के साथ अपराध बढ़ रहे हैं।
निश्चित रूप से इसका एक बड़ा कारण प्रशासन और पुलिस की लापरवाही और अयोग्यता भी है। शांता ने कहा कि गुड़िया हत्याकांड में पुलिस से लोगों का विश्वास उठा जबकि सीबीआई ने जांच की लेकिन यह जांच भी विश्वनीयता प्राप्त न कर सकी तो न्याय के लिए लोग कहां जाएंगे।