गुड़िया केस: चार दिन के भीतर ही सरकार को वापस लेना पड़ा ये फैसला
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शिमला के कोटखाई में गुड़िया के असली नाम पर अपग्रेड किए गए स्कूल का नाम नहीं रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के चलते राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है। बीते शनिवार को सरकार ने गुड़िया के गांव के नजदीक स्थित स्कूल को अपग्रेड कर स्कूल का नामकरण गुड़िया के असली नाम पर करने का फैसला लिया था।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बलात्कार पीड़ित के नाम और पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सरकार ने अब गुड़िया के असली नाम पर स्कूल का नाम रखने का फैसला वापस ले लिया है।
गुड़िया प्रकरण के बाद छात्रों के मन में कई किलोमीटर वीरान जंगल से गुजरने का खौफ घर कर गया था। ऐसे में शनिवार को धार तरपुनू (ताली) स्कूल को मिडल से सीनियर सेकेंडरी स्कूल के तौर पर अपग्रेड करने की अधिसूचना जारी की गई थी।
स्कूल में भरे जाएंगे कई पद, चार किलोमीटर पैदल चलती थी गुड़िया
स्कूल में प्रिंसिपल सहित आठ शिक्षकों के नए पद भी सृजित कर दिए गए हैं। इसी शैक्षणिक सत्र से स्कूल में नौवीं से बारहवीं की कक्षाएं शुरू होंगी। अपग्रेड स्कूल में प्रधानाचार्य का एक, पीजीटी के 5, टीजीटी आर्ट्स का एक पद, टीजीटी मेडिकल का एक और एक पद भाषा अध्यापक का सृजित किया गया है।
दसवीं की पढ़ाई के लिए जंगल के रास्ते से होकर करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर गुड़िया महासू स्कूल जाती थी। स्कूल से लौटते वक्त ही गुड़िया से दुराचार और बाद में उसकी हत्या हुई।
अगर गुड़िया के घर के पास ही दसवीं कक्षा वाला स्कूल होता तो शायद गुड़िया के साथ दरिंदगी नहीं होती। अब देश भर में गूंज रहे इस मामले से हरकत में आई सरकार ने स्कूल अपग्रेड करने का बड़ा फैसला लिया है। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी गुड़िया के असली नाम पर स्कूल का नामकरण करने पर आपत्ति जता चुके हैं।