किन्नौर हादसा: अपनों के इंतजार में परिजनों के नहीं रुक रहे आंसू
अभी किन्नौर के लोगों के बटसेरी हादसे के जख्म भरे नहीं थे कि निगुलसरी हादसे ने उन्हें एक और दर्द दे दिया है। गुरुवार को चगांव की महिलाएं अपने परिजनों के इंतजार के लिए डटी रहीं।
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के निगुलसरी हादसे ने जिले के लोगों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं। हादसे में लापता लोगों के परिजन बुधवार शाम से ही भावानगर पहुंचना शुरू हो गए थे और गुरुवार शाम तक 24 घंटे बीतने के बाद भी वहीं पर रुके रहे। किसी भी शव के वहां पहुंचने पर उन्हें शिनाख्त के लिए बुलाया जाता। इसके बाद वह दोबारा इंतजार करना शुरू कर देते हैं। वहीं परिजन अपनों की सलामती के लिए दुआएं भी कर रहे हैं। अभी तक 13 मृतकों में आठ जिला किन्नौर से संबंधित है। अभी किन्नौर के लोगों के बटसेरी हादसे के जख्म भरे नहीं थे कि निगुलसरी हादसे ने उन्हें एक और दर्द दे दिया है। गुरुवार को चगांव की महिलाएं अपने परिजनों के इंतजार के लिए डटी रहीं।
वहीं, ऊना के देला निवासी तीन दोस्त प्रशांत, वरूण और बलराम भी किन्नौर घूमने आए थे। किन्नौर के सांगला से वापस आते हुए जब निगुलसरी के थाच नाला पहुंचे तो आगे पहाड़ी से पत्थर गिर रहे थे। उन्होंने अपनी गाड़ी किनारे लगाई और बाहर निकल गए। उस समय पहाड़ी से दूसरी तरफ पत्थर गिर रहे थे। अचानक ही गिरती चट्टानों ने अपना रुख बदला और चट्टानें उनकी ओर आने लगीं। चट्टानों को आता देख प्रशांत और वरूण निगुलसरी की ओर भागे, जबकि बलराम विपरीत दिशा में भागा। प्रशांत और वरूण को हादसे में हल्की चोटें आई हैं। लेकिन बलराम का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। परिजन भी तलाश में किन्नौर पहुंच चुके हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने सभी की खाने और ठहरने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही टापरी की कई महिलाएं भी भावानगर अस्पताल में अपनों के आने का इंतजार करती रहीं।
घायलों को जिंदा निकालने के लिए रात से ही शुरू किया बचाव अभियान
किन्नौर के निगुलसरी में पहाड़ी से हुए भयावह भूस्खलन में कितने लोग दबे हैं, अभी इसका अंदाजा ही लगाया जा रहा है। मलबे में दबे लोगों को जिंदा निकालने की उम्मीद में बुधवार देर रात 3 बजे ही बचाव अभियान शुरू कर दिया है। टीमें एनएच से खाई में उतरने के बजाय लिंक मार्ग से सतलुज के किनारे खाई में पहुंचीं और 200 मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद मलबे के पास पहुंचीं। यहां करीब गुरुवार तड़के चार बजे ही मलबा हटाने का अभियान शुरू कर दिया गया। आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान घंटों भूखे-प्यासे डटे रहे। 200 से ज्यादा बचाव दल के लोग एक-एक चट्टान हटाने में जुटे हैं। सुबह सात बजे तीन शव मिलने के बाद कोई सफलता नहीं मिली।
बचाव अभियान में सबसे ज्यादा मुश्किल खाई में आ रही है। यहां तक मशीनरी नहीं पहुंच पाई है। सीएम जयराम ठाकुर ने भी रेस्क्यू लंबा चलाने और मशीनों की मदद लेने की बात कही है। हालांकि, पहाड़ी से बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण जवानों को काफी कठिनाइयां पेश आईं। कई बार रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। पहाड़ी से बीच-बीच में पत्थर गिर रहे थे, बावजूद इसके सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम ने मानवता का परिचय देते हुए सर्च ऑपरेशन को जारी रखा।
एक कटा हुआ हाथ मिला, शवों की हालत बहुत ज्यादा खराब
चट्टानों को हटाने के दौरान तीन शव मिले। बचाव टीम को एक कटा हुआ हाथ भी मिला है। इसके अलावा शवों की चट्टानों से कुचलने से हालत बहुत ज्यादा खराब है। इनकी बड़ी मुश्किल से पहचान हो रही है।
कुछ घंटे ही मिला बचाव दल को आराम
बुधवार रात 9 बजे तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा। अंधेरा और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण मजबूरी में बचाव टीम को सर्च ऑपरेशन रोकना पड़ा। मात्र कुछ घंटे आराम करने के बाद रेस्क्यू टीम गुरुवार तड़के साढ़े तीन बजे दोबारा से अभियान में जुट गई।