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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट शुरू: राजमोहन गांधी बोले- भगवान राम को पॉलिटिकल हीरो बनाने से हैरान

Fri, 14 Oct 2022 11:42 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Fri, 14 Oct 2022 11:42 PM IST
सार

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी ने कहा कि 80-90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के समय भगवान राम को पॉलिटिकल हीरो बनाने को लेकर मैं हैरान हूं। 

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Khushwant Singh Litfest begins: Rajmohan Gandhi said - Surprised to make Lord Ram a political hero
लिटफेस्ट में महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कसौली में 11वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी ने कहा कि 80-90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के समय भगवान राम को पॉलिटिकल हीरो बनाने को लेकर मैं हैरान हूं। अयोध्या के राम मंदिर पर राजनीति होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भगवान राम कोई मानव नहीं बल्कि भगवान का रूप हैं। वह अजर-अमर हैं। उन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। महात्मा गांधी की भी भगवान राम के प्रति आस्था किसी से छिपी नहीं है। वह राम नाम का जाप भी करते थे। लोग जय रामजी की या राम नाम सत्य कहते हैं, क्योंकि हम सभी का मानना है कि राम भगवान हर समय हमारे साथ हैं।

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वहीं, महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू पर कहा कि 75 सालों से लोग उन्हें गलत ठहराते आ रहे हैं। उनकी कुछ नीतियां गलत हो सकती हैं लेकिन वे नहीं। प्रधानमंत्री रहते नेहरू जेल में गए। इसी दौरान उनकी पत्नी की मौत हो गई। महात्मा गांधी और नेहरू ने देश के लिए अपना सामाजिक जीवन तक खत्म कर दिया। कसौली क्लब में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट शुक्रवार से शुरू हुआ। तीन दिन तक चलने वाले इस लिटफेस्ट में 24 सत्र होंगे। पहले दिन वातावरण के बदलाव समेत सात विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रवक्ताओं ने दिए विषयों पर विचार रखे और मंथन किया। सुबह 11:00 बजे पहले सत्र की शुरुआत हुई। पहले दिन अमिताभ घोष, क्रियूस ब्रॉचा, वंदना सक्सेना, राजमोहन गांधी ने विषयों पर मंथन कर अपने विचार रखे। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने किया पहले सत्र का आगाज किया। इस बार पाकिस्तान से कोई भी वक्ता लिटफेस्ट में भाग लेने नहीं पहुंचा। 
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भारत-पाकिस्तान के बीच सुधरने चाहिए रिश्ते : राहुल

Khushwant Singh Litfest begins: Rajmohan Gandhi said - Surprised to make Lord Ram a political hero
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पहुंचीं नामी हस्तियां। - फोटो : संवाद

कसौली में 11वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने पर चर्चा हुई। स्व. खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने कहा कि भारत और पाक के बीच व्यक्तिगत संबंध ठीक होने चाहिए। तभी पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान की ओर उड़ानें शुरू होंगी। ऐसा होने से दोनों देशों के संबंधों में मजबूती आएगी। उन्होंने सरकार से दोनों पक्षों के सांस्कृतिक, साहित्यिक राजदूतों के अलावा वीजा नियमों में ढील देने की अपील की। कसौली क्लब में 11वां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का शुक्रवार से शुरू को शुरू हुआ। तीन दिन तक चलने वाले इस खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में 24 सत्र होंगे। पहले दिन वातावरण के बदलाव समेत छह विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रवक्ताओं ने दिए विषयों पर विचार रखे और मंथन किया। शुरूआत शुक्रवार को 11:00 बजे हुई। पहले दिन सात सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। पहले दिन अमिताभ घोष, क्रियूस ब्रॉचा, टू ब्लू, वंदना सक्सेना, राजमोहन गांधी ने विषयों पर मंथन कर अपने विचार रखे। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने किया पहले सत्र का आगाज किया। 

इसके बाद प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार अमिताभ घोष ने बदलते वातावरण के बारे में मंथन किया। जबकि सायरस ब्रॉचा, टू ब्लू और वंदना सक्सेना ने हाईजैक ऑफ यूअर माइंड के अलावा मल्लिका साराभाई और मालविका सांघ्वी ने इन फ्री फाल एक्सपीरियंस विद लाइफ, गौतम चक्रमनी, देवदीप गांगुली और मक्रंद प्रजापति, मोनिकआ ने श्री ऑरोबिंडो, राजमोहन गांधी और मॉइया मित्रा ने रिफ्लेक्शन ऑन 75 ईयर लिगेसी के विषय पर बातचीत की गई। वहीं शैली चोपड़ा  और शाइजा इल्मी ने ऑफ बाय फॉर विमेन विषय पर अपने विचार रखे। शुरुआत में राहुल सिंह ने कहा कि वर्तमान विश्वभर में हो बदलावों के बारे में इस लिटफेस्ट में मंथन किया जाना है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बारे में भी चर्चा की और कहा कि इस बार पाकिस्तान से लिटफेस्ट में कोई नहीं पहुंचा है। इससे पहले पाकिस्तान से नामी हस्तियां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पहुंचती थी। 

विश्वभर में वातावरण का हो रहा मशीन की तरह प्रयोग, तेजी से कट रहे पेड़-पौधे

प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार अभिताभ घोष ने कहा कि विश्वभर में वातावरण का हो रहा मशीन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। न्यूक्लीयर वॉर के बाद अब यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध से वातावरण के कई बदलाव आ रहे हैं। जो अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। मानव वातावरण को बचाने की बजाय इसका तेजी से दोहन कर रहे हैं और धुआं भी वातावरण के बदलाव का कारण बन रहा है। जंगलों में आग लगने से फैलने वाले धुएं से वातावरण को तो नुकसान हो ही रहा है। साथ ही जंगली-जानवर भी परेशान हो रहे हैं। वहीं तेजी से पेड-पौधे काटे जा रहे है। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन वातावरण बदलाव पर चर्चा की गई। जिसमें साहित्यकार अभिताभ घोष मुख्य वक्ता रहे।

उन्होंने कहा कि तेजी से वातावरण में बदलाव हो रहा हैं। लेकिन किसी का इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसके चलते आगामी कछ समय में लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। 90 के दशक के बाद लगातार बदलाव आए हैं। जिससे अब विश्वभर में बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में कई लोग तो ऐसे हैं जो पेड़-पौधों के बारे में सोचते हैं। लेकिन कई लोग बिना सोचे समझे पेड़ों को काटने में लगे हुए हैं जो भविष्य में उन्हीं पर प्रभाव डालेगा और वातावरण को परिवर्तित करेगा। उन्होंने कहा कि 2500 पेड़ों के एक साथ काटे जाने पर वातावरण कहां से कहां पहुंच जाता है। जो मानव को पता भी नहीं है। इसलिए हमें संसाधनों का इस्तेमाल नियमानुसार करना आवश्यक है।

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