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Shimla News: कथक कलाकार गंगानी ने पेश किया कृष्ण को समर्पित नृत्य

Wed, 13 Aug 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Aug 2025 11:59 PM IST
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Kathak artist Gangani presented a dance dedicated to Krishna
सेंट थॉमस स्कूल में नृत्य पर खूब बजीं तालियां
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कलाकार ने छात्रों को सिखाईं कथक की बारीकियां

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के सेंट थॉमस स्कूल में अंतरराष्ट्रीय कथक कलाकार एवं वादक पंडित राजेंद्र गंगानी ने बुधवार को कृष्ण को समर्पित नृत्य प्रस्तुत किया। गंगानी ने छात्रों को शास्त्रीय नृत्य की कलाएं भी सिखाईं। यह कार्यक्रम स्कूल और स्पिक मैके (युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के प्रचार-प्रसार करने वाली संस्था) के सौजन्य से आयोजित किया गया।

कथक में पारंगत गंगानी ने श्रीकृष्ण को समर्पित नृत्य, लयबद्ध रचनाएं, तबले तथा पद प्रहार की शानदार जुगलबंदी पेश की। इस अवसर पर छात्रों और अन्य दर्शकों को प्रत्येक प्रस्तुति में कथक की लय, भाव एवं कथा-वाचन की अद्वितीय कला देखने को मिली। प्रस्तुति के अंत में गंगानी ने माखन चोरी का प्रसंग नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर स्कूल की छात्राओं जिया, प्रिया और शगुन सहित स्कूल के छात्रों ने गंगानी से कथक से जुड़े कई सवाल पूछे। तबले पर किशोर कुमार, गायन में विनोद गंगानी और सारंगी पर रवि शर्मा ने संगत दी। कार्यक्रम में प्रोडक्शन डिजाइनर, एक्टर और राइटर ललित भरद्वाज, रूपेश भीमटा, विकास गौतम, सेजल, तरुणा मिश्रा, हिमाचल विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के शिक्षकों ने शिरकत की। प्रधानाचार्या विधुप्रिया चक्रवर्ती ने कलाकार पंडित राजेंद्र गंगानी और स्पिक मैके संस्था का आयोजन के लिए आभार जताया। वहीं पंडित राजेंद्र गंगानी ने ऑकलैंड हाउस स्कूल में भी प्रस्तुति दी। प्रधानाचार्या स्मारकी समंथरॉय ने इसके लिए पंडित गंगानी का आभार व्यक्त किया।
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गुरु के बिना ज्ञान नहीं, साधक
बिना साधना नहीं : पं. गंगानी
शिमला। पंडित राजेंद्र गंगानी ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष की उम्र में अपने गुरु एवं पिता कुंदनलाल गंगानी से कथक का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। पखावज गुरु पुरुषोत्तम दास और गायन की शिक्षा आर्यन राज चौधरी से प्राप्त की। उन्होंने कहा कि कलाकार हमेशा सीखता है और वह आज भी सीख रहे हैं। पांच वर्ष की आयु में उन्होंने जाेधपुर के टाउनहॉल में पहली प्रस्तुति दी थी। वह लंदन, यूरोप, चीन और अफगानिस्तान जैसे दुनिया के प्रमुख शहरों के मंच पर प्रस्तुति दे चुके हैं। कुछ भी सीखने के लिए साध बनकर साधना करना जरूरी है। एक अच्छे गुरु का मार्गदर्शन ही उन्हें सफल बना सकता है। छात्रों को चाहे नृत्य सीखना हो या गायन सीखना हो या फिर शिक्षा ग्रहण करनी हो उसमें एक अच्छा छात्र बनना तथा एक अच्छा गुरु पाना सबसे ज्यादा जरूरी है। कथक कलाकार गंगानी को वर्ष 2003 में भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है, साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
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