{"_id":"60fe5ddfe0df8e599b6e2d9c","slug":"kargil-vijay-diwas-today-in-india-captain-lila-ram-remember-memories-of-kargil-war","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारगिल विजय दिवस 2021: शहादत याद कर भर आईं कैप्टन लीलाराम की आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारगिल विजय दिवस 2021: शहादत याद कर भर आईं कैप्टन लीलाराम की आंखें
Mon, 26 Jul 2021 12:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, ददाहू (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क, ददाहू (सिरमौर)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:32 PM IST
सार
वर्ष 2008 में कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए लीलाराम ने बताया कि कारगिल युद्ध भले ही इतिहास के पन्नों पर लिखा गया है, लेकिन इसमें उन्होंने मौत को नजदीक से देखा है।
विज्ञापन
कैप्टन लीलाराम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कारगिल युद्ध जीतकर टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने वाले ददाहू के जांबाज सैनिक कैप्टन लीलाराम की आंखें अपने साथियों की शहादत को याद कर भर आईं। उन्होंने 36 जांबाज साथियों की मौत का मंजर अपनी आंखों से देखा। उस दौरान वह भारतीय सेना की 18 ग्रेनेडियर यूनिट में नायब सूबेदार के पद पर थे, जिसका नेतृत्व ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने किया था। चार जुलाई, 1999 को 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने का गौरव कैप्टन लीलाराम को भी प्राप्त हुआ।
विज्ञापन
वर्ष 2008 में कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए लीलाराम ने बताया कि कारगिल युद्ध भले ही इतिहास के पन्नों पर लिखा गया है, लेकिन इसमें उन्होंने मौत को नजदीक से देखा है। उनकी यूनिट के 36 सैनिक युद्ध में अपनी जान गंवा बैठे थे। उनकी मौत का मंजर उनकी आंखों के आगे घूमकर आज भी रौंगटे खड़े कर देता है। कैप्टन लीलाराम उस गम को आज तक भुला नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही पूरा देश आज कारगिल विजय दिवस का जश्न मना रहा है, लेकिन उन जांबाज सैनिकों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
कारगिल में हिमाचल के 52 जवानों ने पाई थी शहादत
जिला कांगड़ा से कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया, जीडीआर बजिंद्र सिंह, आरएफएन राकेश कुमार, लांस नाइक वीर सिंह, आरएफएन अशोक कुमार, आरएफएन सुनील कुमार, सिपाही लखवीर सिंह, नाइक ब्रह्म दास, आरएफएन जगजीत सिंह, सिपाही संतोख सिंह, हवलदार सुरिंद्र सिंह, लांस नाइक पदम सिंह, जीडीआर सुरजीत सिंह, जीडीआर योगिंद्र सिंह शामिल थे।
विज्ञापन
जिला मंडी से कैप्टन दीपक गुलेरिया, नायब सूबेदार खेम चंद राणा, हवलदार कृष्ण चंद, नाइक सरवन कुमार, सिपाही टेक राम मस्ताना, सिपाही राकेश कुमार चौहान, सिपाही नरेश कुमार, सिपाही हीरा सिंह, जीडीआर पूर्ण सिंह, एल/हवलदार गुरदास सिंह।
हमीरपुर से हवलदार कश्मीर सिंह (एम-इन-डी), हवलदार राजकुमार (एम-इन-डी), सिपाही दिनेश कुमार, हवलदार स्वामी दास चंदेल, सिपाही राकेश कुमार, आरएफएन प्रवीण कुमार, सिपाही सुनील कुमार, आरएफएन दीप चंद (एम-इन-डी)।
जिला बिलासपुर से हवलदार उधम सिंह, नाइक मंगल सिंह, आरएफएन विजय पाल, हवलदार राजकुमार, नाइक अश्वनी कुमार, हवलदार प्यार सिंह, नाइक मस्त राम। जिला शिमला से जीएनआर यशवंत सिंह, आरएफएन श्याम सिंह (वीआरसी), जीडीआर नरेश कुमार, जीडीआर अनंत राम।
जिला ऊना से कैप्टन अमोल कालिया, आरएफएन मनोहर लाल, जिला सोलन से सिपाही धर्मेंद्र सिंह, आरएफएन प्रदीप कुमार। सिरमौर जिला से आरएफएन कुलविंद सिंह, आरएफएन कल्याण सिंह, जिला चंबा से सिपाही खेम राज, जिला कुल्लू से हवलदार डोला राम कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे।