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कांगड़ा: वोह में लापता नीरज का 105 घंटे बाद भी नहीं चला पता

Fri, 16 Jul 2021 08:13 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शाहपुर (कांगड़ा)
अमर उजाला नेटवर्क, शाहपुर (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 16 Jul 2021 08:13 PM IST
सार

एसडीएम शाहपुर डॉ. मुरारी लाल ने बताया कि अब केवल नीरज (18) ही लापता है। बाकी नौ लोगों के शव बरामद कर उनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है। 

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kangra voh valley flood update today: search operation continued
वोह घाटी(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की वोह घाटी की रुलेहड़ पंचायत में बीते सोमवार को बारिश के कारण आई आपदा के कारण मलबे में 10 लोग दब गए थे, जिनमें से गुरुवार तक नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि घटना के 105 घंटे बाद भी नीरज पुत्र भीम सिंह का कोई पता नहीं चला है। सोमवार से ही एनडीआरएफ, पुलिस जवान और जिला प्रशासन के लगभग 130 जवान लापता लोगों को ढूंढने में लगे हैं। इसके साथ ही सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। देर शाम तक एनडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों सहित सैकड़ों लोग नीरज की तलाश में जुटे हैं। एसडीएम शाहपुर डॉ. मुरारी लाल ने बताया कि अब केवल नीरज (18) ही लापता है। बाकी नौ लोगों के शव बरामद कर उनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है। छह अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया था। 

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छह घंटे तक मौत से लड़ते रहे थे विजय कुमार
 कांगड़ा की वोह घाटी में भारी बारिश से सोमवार को मची तबाही का मंजर विजय कुमार की आंखों में रह रहकर तैर रहा है। शाहपुर अस्पताल में उपचाराधीन विजय तबाही के इस दौर में मौत से घंटों जूझते रहे। किस्मत से वह पत्नी और एक बेटी समेत मौत के चुंगल से छूटने में कामयाब रहे। हालांकि, इस तबाही में डेढ़ साल की बेटी के हमेशा के लिए चले जाने का गम उन्हें जिंदगीभर सालता रहेगा। हादसे में गंभीर घायल छह लोग सिविल अस्पताल शाहपुर में उपचाराधीन हैं। मूल रूप से चंबा की सिंहुता तहसील के भियोरा गांव के निवासी 40 वर्षीय विजय कुमार भी इनमें से एक है। रोजी-रोटी के लिए विजय वोह में परिवार के साथ किराये के मकान में रह रहा था।  
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विजय कुमार ने बताया कि आपदा के समय वह परिवार सहित घर पर ही थे। सोमवार सुबह तेज बारिश के बाद करीब 10:30 बजे भूस्खलन हुआ। भारी भूस्खलन की आहट से जब तक वह संभल पाते मलबा उनके घर के ऊपर आ चुका था। घटना से कुछ देर पहले ही उन्होंने अपनी डेढ़ साल की बेटी शबनम को कमरे में सुलाया था। वह अपनी पत्नी रचना (30) और बेटी वंशिका (8) के साथ बरामदे में ही बैठे थे। एकदम से मलबा उनके घर के ऊपर आ गया था। उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। मासूम शबनम को कमरे से उठा तक नहीं सके।  बकौल विजय कुमार, उनका पूरा शरीर मलबे में दब चुका था। केवल कंधे से ऊपर का हिस्सा ही बचा था। 

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