दिवालिया होने के डर से केसीसी बैंक ने बनाया नया प्लान, लोन देने के लिए उठाया ये कदम
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केसीसी बैंक में नए नीरव मोदी की एंट्री रोकने के लिए बैंक ने एक नई कमेटी गठित कर दी है। केसीसी बैंक ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा लोन देने के लिए अब एक स्पेशल कमेटी गठित की है। बैंक के जीएम इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे। एक करोड़ रुपये या इससे अधिक का लोन देने की प्रक्रिया से लेकर लोन चुकाने तक यह कमेटी ऋण की निगरानी करेगी।
यानी, बैंक ने बड़े लोन पर अब तीसरी आंख का पहरा बैठा दिया है। यह कदम पुरानी गलतियां रोकने के लिए उठाया है। इस स्पेशल कमेटी में जीएम के अलावा करीब चार सदस्य होंगे। सदस्यों में एजीएम और लोन देने वाली शाखा का मैनेजर भी होगा। ऋणदाता को लोन की अगली किस्त बैंक तभी देगा जब फिजिकल वेरिफिकेशन में यह साबित हो जाएगा कि जिस काम के लिए लोन लिया गया है वह हो रहा है या नहीं।
बैंक में बड़े लोन की निगरानी के लिए पहली बार कोई कमेटी गठित की गई है। कमेटी शुरू से आखिर तक चेक करती रहेगी कि कहीं लोन में गड़बड़ी तो शुरू नहीं हुई। केसीसी बैंक के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज ने एक करोड़ से ज्यादा के लोन देने के लिए निगरानी कमेटी गठित करने की पुष्टि की है।
8 लोगों ने 136 करोड़ दबाए, बैंक हो रहा था दिवालिया
एनपीए यानी नॉन परफारर्मिंग असेट्स बेतहाशा बढ़ने से केसीसी बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था। मात्र 8 लोगों को बैंक की ओर से बांटे गए 136 करोड़ रुपये के लोन एनपीए में हैं। पिछले पांच साल में 336 में से 294 लोन बैंक में गलत दिए गए थे। इसी वजह से बैंक को इंटरव्यू लेने के बावजूद कर्मचारियों की भर्ती स्थगित करनी पड़ी।
हालात अभी भी मुफीद नहीं, एनपीए 21 फीसदी पहुंचा
वर्तमान में एनपीए 21 फीसदी पहुंच गया है। यानी, 21 फीसदी ऋणदाता बैंक का लोन वापस नहीं कर रहे हैं। मार्च 2018 में एनपीए 19 फीसदी था। हालांकि, बैंक में पहले एनपीए मैनुअल तैयार किया जाता था। मैनुअल के खेल में बैंक मैनेजर अपनी शाखा को एनपीए में जाने से बचाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर कर देते थे।
इस वजह से वित्तीय वर्ष के आखिर में एनपीए का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाता था। अब केसीसी बैंक में एनपीए को आटो मोड पर लाया गया है। यानी, एनपीए को अब कंप्यूटर आटोमैटिक तरीके से आंकता है। आटो मोड भी एनपीए में वृद्धि की वजह माना जा रही है।