Kala Diksha Award: दिल्ली में पद्मश्री विद्यानंद सरैक और गोपाल हाब्बी को कला दीक्षा सम्मान
उपमंडल राजगढ़ क्षेत्र के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लोक संस्कृति के संरक्षक पद्मश्री विद्यानंद सरैक और गोपाल हाब्बी को दिल्ली में दीक्षा सम्मान से नवाजा गया।
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के उपमंडल राजगढ़ क्षेत्र के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लोक संस्कृति के संरक्षक पद्मश्री विद्यानंद सरैक और गोपाल हाब्बी को दिल्ली में दीक्षा सम्मान से नवाजा गया। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से आयोजित कला दीक्षा सम्मान समारोह में देशभर के विभिन्न विधाओं से जुड़े कला गुरुओं के साथ बुधवार को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जीके रेड्डी रहे। इसके अतिरिक्त संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव उमा नंदूरी और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा भी उपस्थित रहीं।
देश के विभिन्न राज्यों में विलुप्त होती जा रही लोक विधाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एवं सनातन धर्म की गुरु शिष्य परंपरा को प्रोत्साहन देने के लिए संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया है। कला दीक्षा सम्मान समारोह में भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से विभिन्न विधाओं से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों को इस कार्यक्रम में सम्मान प्रदान किया गया। हिमाचल प्रदेश से पद्मश्री विद्यानंद सरैक व संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा कलाकार गोपाल हाब्बी को भी संस्कृति मंत्री ने सम्मानित किया। पद्मश्री विद्यानंद सरैक को संगीत नाटक अकादमी द्वारा लोक संगीत के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मान प्रदान किया जा चुका है और लोक साहित्य में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।
युवा कलाकार गोपाल हाब्बी को मुखौटा निर्माण और मुखौटा नृत्य को प्रोत्साहन देने के लिए सम्मानित किया गया। हाब्बी द्वारा सिंहटू नृत्य व डगेली नाच मुखौटे का निर्माण करने में विशेष भूमिका निभाई है। इसके अलावा बढ़ाल्टू, सिंहटू एवं डगेली नाच के परिधानों के निर्माण का कार्य भी किया गया है। पद्मश्री विद्यानंद सरैक व गोपाल हाब्बी ने संगीत नाटक अकादमी का आभार जताते हुए कहा कि संगीत नाटक अकादमी ने प्रदेश की लोक कलाओं को यह सम्मान प्रदान किया है।