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रिपोर्ट में खुलासा, अभी भी पीलिया का खतरा बरकरार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 12 Feb 2016 09:57 AM IST
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शिमला में पानी की टंकियों में अब तक पीलिया का खतरनाक वायरस घात लगाकर बैठा है। अश्वनी खड्ड से शहर के जिन क्षेत्रों की पानी की टंकियों में पेयजल की सप्लाई हुई, उन टंकियों में अभी यह वायरस मौजूद है। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) पुणे की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। टंकियों के पेयजल सहित सात सैंपल फेल हो गए हैं।
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एनआईवी की टीम ने 27 और 28 जनवरी को शहर से पानी के सैंपल भरे थे। सोलन में भी अश्वनी खड्ड के ट्रीटेड और अन-ट्रीटेड पानी में पीलिया का वायरस मिला है। अश्वनी खड्ड परियोजना से दो जनवरी के बाद शहर को पानी की आपूर्ति बंद है। बावजूद शहर के पानी में पीलिया का वायरस मौजूद है। नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने पत्रकार वार्ता में दावा किया है कि एनआईवी की टीम की ओर से लिए गए पानी के सात सैंपल फेल हो गए हैं, इन सैंपलों में पीलिया का वायरस पाया गया है।
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शहर के उन क्षेत्रों में जहां अश्वनी खड्ड परियोजना से पानी की आपूर्ति होती है. वहां पानी की टंकियों में अभी भी पीलिया का वायरस मौजूद है। ऐसे में शहर में पीलिया की रोकथाम के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अश्वनी खड्ड परियोजना से शहर को पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद माना जा रहा था कि इनक्यूबेशन पीरियड पूरा होने पर 15 फरवरी के बाद पीलिया के नए मामले सामने नहीं आएंगे।
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लेकिन शहर में लोगों की टंकियों के पानी में पीलिया का वायरस पाए जाने के बाद अब इनक्यूबेशन पीरियड आगे बढ़ने की संभावना है। डपंवर ने कुसुम्पटी, विकासनगर, छोटा शिमला, खलीनी और न्यू शिमला के लोगों से घरों की टंकियां साफ करने की अपील की है। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने कहा कि बुधवार देर शाम सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है। शहर में पीलिया फैलने का मुख्य कारण हेपेटाइटिस- ई ही है।
नए मामले आए सामने
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला में पीलिया के मरीज लगातार आ रहे हैं। अस्पताल में कसुम्पटी, परिमहल, छोटा शिमला, विकासनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोग पीलिया के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। वीरवार को अस्पताल में कुल 37 लोग पहुंचे। टेस्ट रिपोर्ट आने पर सोलह लोग पॉजिटिव पाए गए। अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. धर्मिला चौहान ने बताया कि अस्पताल में सोलह नए मामले पॉजिटिव पाए गए हैं। इधर, राजधानी में वीरवार को शहर के अस्पतालों से पीलिया के कुल 30 पॉजिटिव मामले सामने आए। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने पीलिया के पॉजिटिव मामलों की जानकारी दी है।
डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर का कहना है कि प्रदेश सरकार को पीलिया को गंभीरता से लेना चाहिए। शहर के लिए जल्द से जल्द कोटी और बरांडी के पानी का वैकल्पिक इंतजाम किया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर ही पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। 4 मार्च को होनी वाली कार्यशाला में समस्या का स्थायी निदान ढूंढने का प्रयास किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक से की पूछताछ
पीलिया मामले को लेकर पुलिस ने वीरवार को पर्यावरण एंव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक से एसपी कार्यालय में पूछताछ की। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से बोर्ड कैसे सैंपल लेता है और इसका क्या पैमाना रहता है इस बारे में जानकारी हासिल की। बोर्ड का इस मामले में कितनी भूमिका होती है इस पर भी सवाल किए गए। उधर, एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले की बारीकी से जांच चल रही है।