जन शताब्दी जब्त होने के डर से रेलवे में हड़कंप
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऊना के मुआवजा न देने पर जनशताब्दी एक्सप्रेस को किसानों के हवाले करने के फैसले के बाद उत्तर रेलवे हरकत में आ गया है। रेलवे किसानों की अधिकृत की जमीन का मुआवजा देने को तैयार हो गया है।
हालांकि, रेलवे का लीगल सेल अभी यह तय करेगा कि राशि हाईकोर्ट के माध्यम से जमा कराई जाए या ऊना एडीजे के माध्यम से। उत्तर रेलवे के अधिवक्ता मोहन लाल भूंचाल ने इसकी पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की एक अपील हाईकोर्ट में लंबित है। वह एडीजे के फैसले की प्रति के इंतजार में हैं। इसके बाद तय किया जाएगा कि राशि किस कोर्ट के माध्यम से जमा कराई जाए।
अदालत के फैसले की प्रति का इंतजार
अंबाला स्थित उत्तर रेलवे के डीआरएम अनिल काठपाल ने बताया कि वह अदालत के फैसले की प्रति का इंतजार कर रहे हैं। आदेशों की कॉपी मिलने के बाद लीगल सेल से इस बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा।
किसानों की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार सैणी ने बताया कि ऊना के दो किसानों की भूमि ऊना-अंब रेलवे लाइन के लिए वर्ष 1998 में ली गई थी, जिसका उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया।
मामले में पहले एडीजे ऊना ने अपना फैसला किसानों के हक में सुनाया, जिसे रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील की। हाईकोर्ट ने इस केस में छह महीने का स्टे दिया। लेकिन इसके बावजूद जब राशि जमा नहीं हुई तो उनकी ओर से एडीजे ऊना में केस फाइल किया गया। इस पर अदालत ने ट्रेन को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं।
16 तक पैसा न दिया तो ट्रेन किसानों की
अनूठे फैसले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश बंसल ने किसानों को रेलवे लाइन में जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा न मिलने पर दिल्ली से ऊना आने वाली जन शताब्दी ट्रेन को अटैच कर प्रभावितों के हवाले करने के आदेश दिए हैं। 16 अप्रैल तक करीब 35 लाख रुपये मुआवजा राशि जमा न करवाई तो ट्रेन को रोककर उसे किसानों के हवाले कर दिया।