धूमल की लैपटॉप योजना को लेकर संशय में जयराम सरकार
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मेधावियों को लैपटॉप देने योजना जारी रखने को लेकर जयराम सरकार साल के आखिरी महीने में भी संशय में है। दसवीं-जमा दो के दस हजार मेधावियों को लैपटॉप देने पर सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है।
सरकार न तो योजना को बंद कर रही है और न ही लैपटॉप दे पा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के दृष्टि पत्र में कॉलेज स्टूडेंट्स को लैपटॉप देने की घोषणा भी अभी फाइलों में बंद है।
पूर्व धूमल सरकार ने साल 2012 में दसवीं के चार हजार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना शुरू की थी। दिसंबर 2012 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी यह योजना जारी रही।
वीरभद्र सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 12वीं कक्षा के विद्यार्थी भी जोड़े। मेधावियों की संख्या बढ़ाकर दस हजार कर दी, लेकिन जयराम सरकार लैपटॉप देने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं ले सकी है।
शिक्षा निदेशालय की ओर से मई में मांगे गए स्पष्टीकरण का भी अभी जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में साल 2017-18 के दौरान 10वीं-जमा दो के मेधावियों को लैपटॉप मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।
वीरभद्र की फोटो बदलने में दिखाई थी मुस्तैदी
उधर, जयराम सरकार कॉलेजों के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने पर भी फैसला नहीं ले पा रही है। कितने विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए जाएंगे, यह भी तय नहीं हो पाया है। भाजपा ने चुनावी दृष्टिपत्र में फर्स्ट डिविजन में पास होने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स को लैपटॉप देने की घोषणा की है।
उधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकार से मंजूरी के बाद ही इस मामले पर कदम उठाए जाएंगे। सरकार को स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को लैपटॉप देने के लिए बजट प्रावधान का ब्योरा भेजा है।
जयराम सरकार भले ही अभी यह तय नहीं कर पाई है विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए जाने हैं या नहीं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की लैपटॉप से फोटो बदलने में सरकार ने मुस्तैदी दिखाई थी।
प्रदेश में नई सरकार बनते ही जनवरी में शिक्षा विभाग ने सत्र 2016-17 के मेधावियों को दिए जा रहे लैपटॉप के वितरण पर रोक लगा दी थी। लैपटॉप के ऑन होते ही उसमें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की फोटो आ रही थी। इसे हटाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की फोटो लगाने के बाद ही विभाग ने वितरण किया था।