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इटेलियन मधुमक्खी पर फिदा होने लगे सूबे के सेब बागवान, जानिए वजह

Sat, 28 Apr 2018 01:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sat, 28 Apr 2018 01:28 PM IST
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italian bees using for pollination in apple farming in himachal

सेब राज्य का दर्जा प्राप्त हिमाचल में बागवान इटली की सेब प्रजाति के बाद इटेलियन मधुमक्खी पर भी फिदा होने लगे हैं। सेब की खेती में परागण के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लाई गई इस प्रजाति की मधुमक्खी ने बागवानों का दिल बाग-बाग कर दिया है। वजह इन मक्खियों के काम करने की क्षमता है, जिससे पहाड़ी प्रजाति की मधुमक्खी पिछड़ रही है।

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इटेलियन मधुमक्खी बेहद फुर्तीली होती है जो पहाड़ी मक्खी की तुलना में कम समय में ज्यादा फूलों पर जाती है। इससे परागण प्रक्रिया तेज होती है। जिससे पैदावार की संभावना बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए इस साल भी बहुत से बागवान इटेलियन मधुमक्खियों से भी परागण प्रक्रिया करा रहे हैं। इन दिनों राज्य के सेब बगीचों में फूलों से फलों के सेट होने की प्रक्रिया चल रही है। इसे परागण प्रक्रिया कहते हैं।
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इसमें मधुमक्खियां बहुत सहयोग करती हैं। वे पॉलीनाइजर सेब किस्म के फूलों से पराग उठाकर उसे रेड डिलिशियस, रॉयल या अन्य किस्मों के फूलों पर डाल देती हैं। इससे फल बनते हैं। सेब के फलों की दो तरह की किस्में होती हैं। एक पॉलीनाइजर किस्म होती है। ये अपना और अपने आसपास उगी दूसरी तमाम प्रजातियों के सेब के पेड़ों में पोलीनेशन करती है।

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पोलीनेशन में मददगार

italian bees using for pollination in apple farming in himachal

रेड डिलिशियस और रॉयल सेब किस्में अपना पोलीनेशन खुद नहीं कर पातीं, जबकि यही किस्में बाजार में सबसे अच्छे रेट पाती हैं। ऐसे में बाहरी प्रदेशों से लाई जाने वाली इटेलियन मधुमक्खियां या पहाड़ी मधुमक्खियां ही इनकी परागण प्रक्रिया में खूब सहायक होती हैं।

राज्य के बागवानी क्षेत्रों में मौसम ठंडा रहने के कारण यहां मधुमक्खियों का बड़े पैमाने पर बागवान खुद उत्पादन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में हिमाचल के निचले गरम इलाकों से लाई जाने वाले मधुमक्खियां कम पड़ जाती है। नतीजतन बागवानों को बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता है।

काम में आगे, सेहत में पीछे है इटेलियन प्रजाति

italian bees using for pollination in apple farming in himachal

प्रदेश के प्रख्यात बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज के अनुसार एपिस मेलिफेरा इटेलियन प्रजाति की हनी बी है। ये पहाड़ी मधुमक्खी से ज्यादा फुर्तीली है। दो से तीन सेकेंड में एक फूल पर जाती है। यह मक्खी एक मिनट में 25 से 30 फूलों पर पहुंच जाती है।

इसका सीधा लाभ परागण प्रक्रिया को मिलता है। एपिस सिरेना इंडिका देसी या पहाड़ी मधुमक्खी है। ये भारतीय मधुमक्खी तीन से चार सेकेंड में एक से दूसरे फल पर जाती है।

एक मिनट में 20 फूलों को पोलीनेट करती है। हालांकि पहाड़ी मधुमक्खियां बीमारियों से लड़ने की ज्यादा क्षमता रखती हैं, जबकि ये क्षमता इटेलियन मधुमक्खी में कम होती है।

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