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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   It took 50 years to correct a mistake, now the name of Sach Pass is Sachche Jot, know the whole matter

Chamba: एक गलती सुधारने में लग गए 50 साल, साच पास नहीं, सचे जोत से जाना जाएगा चंबा-पांगी को जोड़ने वाला दर्रा

Sat, 02 Nov 2024 10:50 AM IST
Krishan Singh सुभाष कुमार अग्निहोत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
सुभाष कुमार अग्निहोत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 Nov 2024 10:50 AM IST
सार

 जनजातीय क्षेत्र पांगी को जिला मुख्यालय चंबा के साथ जोड़ने वाले निकटतम जोत के नाम की गलती को सुधारने में 50 वर्ष का समय लग गया। 

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It took 50 years to correct a mistake, now the name of Sach Pass is Sachche Jot, know the whole matter
सचे जोत चंबा। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र पांगी को जिला मुख्यालय चंबा के साथ जोड़ने वाले निकटतम जोत के नाम की गलती को सुधारने मेंं 50 वर्ष का समय लग गया। चंबा-बैरागढ़ से किलाड़ के रास्ते में पड़ने वाले सचे जोत का गलत उच्चारण होने से इसे साच पास कहा जाता रहा।  गजट समेत राजस्व विभाग के दस्तावेजों पर नजर दौड़ाई जाए तो इसका सही नाम सचे जोत है। इसका प्रमाण यह भी सामने आता है कि पहाड़ों में जितने भी दर्रे हैं, उनका नाम उस स्थान विशेष के नाम से ही रखा गया है। 

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इस वजह से रखा गया सच्चे जोत नाम
जैसे चैहनी नाम से चैहनी पास, पधरी नाम से पधरी जोत, दराटी आकार के नाम से दराटी जोत इसी प्रकार जोत पर विद्यमान सचे जोत वाली माता के नाम पर सचे जोत था। इसका गलत उच्चारण के कारण ये साच पास बन गया। वैसे भी इस जोत के आसपास साच नाम की कोई जगह न चुराह में है और न ही पांगी में। लंबी जद्दोजहद के दौरान प्रदेश सरकार, राजस्व विभाग, वित्त सचिव, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और जिला प्रशासन के पास ये मामला पहुंचने के बाद अब आखिरकार गलत उच्चारण साच पास हो हटा कर लोक निर्माण विभाग मंडल पांगी की ओर से सचे जोत को सूचना पट्ट पर अंकित कर दिया है। 

आठ सालों से सरकार के पास उठाया मामला
पांगी कल्याण संघ पांगी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृज लाल ठाकुर ने बताया कि उपयुक्त गलत नाम को दुरुस्त करवाने के लिए पांगी के करयूनी गांव के नारायण सिंह (सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी) ने अहम योगदान दिया। उन्होंने करीब 8 साल से निरंतर प्रदेश सरकार, राजस्व, वित्त सचिव, मुख्य अभियंता और प्रशासन के समक्ष मामला सचे े जोत का बोर्ड लगा दिया है। जिला भाषा अधिकारी तुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि वर्ष 1965 के गजट में सचेे जोत का जिक्र है। इसके उपरांत लोगों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से शायद सचेे जोत की जगह साच पास का उच्चारण करना आरंभ किया।

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जुड़ी हैं धार्मिक भावनाएं
सचे जोत के साथ पांगवाल समुदाय की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। पांगी घाटी का कोई भी व्यक्ति इस जोत की तरफ जाता है तो घर से धूप जलाकर पूजा करने के बाद ही प्रस्थान करता है। पुराने समय से ये इकलौता रास्ता पांगी से बाहर जाने का रहा है। 

लौट गए थे आतंकवादी
मुगल काल में पंगवाल अपने धर्म की रक्षा के लिए इस जोत को लांघ कर घाटी में बसे थे। इसी कारण आज भी घाटी में मात्र हिंदू लोग हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि मुगलों के आतंकवादी इस जोत के रास्ते पांगी आने लगे तो जोत पर उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और आगे का रास्ता नहीं दिखाई दिया। तब वे उल्टे पांव वापस चले गए।

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