भारत के इस राज्य में बसा है मिनी इस्राइल, यहां भी गूंज रहा है मोदी-मोदी
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भारत के भीतर भी ऐसी दो जगहें हैं जहां ज्यादातर लोग इस्राइल के रहते हैं। इनके लिए रेस्टोरेंट बने हैं और इन्होंने अपने घर भी यहीं बना लिए हैं। ये जगह है हिमाचल के कुल्लू-मनाली के कसोल में और दूसरा मैक्लोडगंज के धर्मकोट में।
दोनों जगह मोदी-मोदी गूंज रहा है। हिमाचली टोपी पहनकर इस्राइल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से यहां रह रहे इस्राइलियों में भी खासा उत्साह है। वे मोदी दौरे की इंटरनेट और फोन पर पल-पल की खबर ले रहे हैं।
अब उन्हें उम्मीद है कि इससे दोनों देशों के बीच संबंध और प्रगाढ़ होंगे। कसोल में रह रहे इस्रराइली नागरिक डियाल, ओमर और अवी ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे के बाद अब इस्रराइल के अधिक लोगों को टूरिस्ट वीजा मिलेगा।
मौज-मस्ती और छुट्टियां मनाने हजारों की तादाद में इस्राइली यहां हर साल आते हैं। हिमाचल की आबोहवा और दिलकश वादियों के मुरीद इन इस्राइलियों की कसोल और धर्मकोट में कॉलोनियां जैसी बस गई हैं।
इस्राइल के लोगों में मोदी दौरे से खुशी, पीएम के बारे में ये कहा
इन क्षेत्रों में स्थानीय लोग कम और इस्राइली ज्यादा दिखेंगे। यहां के रेस्तरां के बाहर इस्राइली भाषा हिब्रू में ही बोर्ड लगे हुए हैं। इस्राइली ही नहीं यहां के दुकानदार भी हिब्रू बोलते हैं। इनकी जरूरतों के मुताबिक ही यहां दुकानें सजी हैं।
संगीत भी उन्हीं के देश का बजता है। हेयर सैलून में बालों की कटिंग भी इस्राइल स्टाइल में होती है। कसोल और धर्मकोट दोनों जगह यहूदियों का पूजा स्थल खबद हाउस भी है। कई इस्राइली तो शादी करके यहीं बस गए हैं।
इस्राइल से धर्मकोट पहुंचे बाथेन, एनव और क्रिस्टी बोलीं-70 साल में भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा से उनके देश में तो उत्सव का माहौल है ही, यहां बसे इस्राइली भी प्रफुल्लित हैं। यहूदियों के धार्मिक स्थल खबद हाउस से बाहर आते पिटाओ और अमित कहते हैं-
पीएम मोदी की इजराइल यात्रा से दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ेगा। बेंजामिन, राफेल, कैरी कहते हैं कि इस्राइल में अपने परिजनों से आज ही फोन पर बात हुई, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के ऐतिहासिक इस्राइल दौरे के बारे में बताया।
धर्मकोट की वादियां इसलिए खींच लाती हैं इजरायल से
प्रकृति की असीम सुंदरता समेटे धर्मकोट गांव बीते कई दशकों से इस्राइल मूल के लोगों का बसेरा बना हुआ है। इस्राइल में पेड़-पौधे कम होने से भीषण गर्मी पड़ती है। देश में युद्ध जैसे हालात हर समय बने रहते हैं।
तनाव से निजात पाने के लिए धर्मकोट का रुख करते हैं। यहां की आबोहवा और प्राकृतिक सुंदरता उनको मानसिक सुकून देती है। एसपी दफ्तर धर्मशाला के अनुसार धर्मकोट में हर वर्ष औसतन दो से ढाई हजार इस्राइली पर्यटक आते हैं। अभी तक 750 इस्राइली धर्मकोट आ चुके हैं।
हम्मस और फालाफेल पसंदीदा भोजन
कसोल में इस्रराइलियों के लिए यहां हम्मस, पिटा ब्रेड और फालाफेल बनता है जिसे वे बड़े चाव से खाते हैं। हालांकि इस्रराइली बीफ भी खाते हैं, लेकिन यहां परोसा नहीं जाता। यहां 500 रुपये तक किराये पर एक कमरा मिल जाता है। घाटी में आसानी से मिलने वाली चरस, अफीम भी उन्हें यहां खींच लाती है।
पार्वती नदी के किनारे बसा है कसोल
पर्यटन नगरी मनाली से सटा कसोल गांव पार्वती नदी के किनारे बसा है। यहां ज्यादातर इस्राइली टेंटों में रहते हैं। बाइक पर वादियों में घूमते रहते हैं। यहां के रेस्तरां में नमस्कार की बजाए ‘शलोम’ से स्वागत होता है।
यहां ‘स्टार ऑफ डेविड’ वाले इस्रराइली झंडे दिखाई देते हैं। इस्रराइली अंग्रेजी नहीं जानते फिर भी यहां के लोगों से पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। करीब दो दशक पहले यहां उन्होंने आना शुरू किया था। अब उनकी सबसे पसंदीदा जगह है। शायद इसका बड़ा कारण है कि यहां के लोग इस्राइलियों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाते हैं।