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पकड़ा गया आईपीएच मंत्री स्टोक्स का झूठ!

Tue, 03 Jun 2014 08:18 PM IST
Updated Tue, 03 Jun 2014 08:18 PM IST
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IPH minister claims are not matching with departmental records

शिमला शहर में पानी की सप्लाई को लेकर आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स का दावा कुछ और ही कह रहा है। उन्होंने कहा था कि राजधानी शिमला को 33.75 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी की जरूरत है।

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वहीं, उनके अपने ही महकमे यानि राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट कह रही है कि शहर को गर्मियों में 42 एमएलडी पानी चाहिए।

इससे एक सवाल उठता है कि क्या मंत्री गलत कह रही हैं या फिर सरकारी वेबसाइट ही झूठी सूचना दे रही है। राजधानी के कई क्षेत्रों में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है।

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आनन फानन में बुलाई बैठक

IPH minister claims are not matching with departmental records

इस मामले को ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से छापे जाने के बाद सोमवार को सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने राज्य सचिवालय में आनन-फानन में बैठक बुलाई।

इसमें स्टोक्स बोलीं कि शिमला को 33.75 एमएलडी पानी की जरूरत है और विभाग 40 एमएलडी की आपूर्ति कर रहा है। सभी स्रोतों से 45 एमएलडी की आपूर्ति हो रही है। कुल क्षमता 60 एमएलडी की है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से कोई ढील नहीं है। चूंकि, वितरण का काम नगर निगम शिमला का है।

इसलिए पानी के बंटवारे की खामियां निगम प्रशासन के स्तर पर हो सकती हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विनीत चौधरी भी बोले कि चार बार नगर निगम को अपना ढांचा सुधारने को बैठकों में भी कहा जा चुका है, पर कुछ वैसा हो नहीं सका।

लोगों को पिलाया जा रहा गंदा पानी

IPH minister claims are not matching with departmental records

वहीं, अश्वनी खड्ड में बहने वाले मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट हुए गटर के पानी को पेयजल योजना के पंपिंग स्टेशन में साफ करने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

शहर की जनता को ट्रीट हुए सीवरेज के पानी को पिला रहा आईपीएच महकमा इसको लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पानी साफ करने की प्रक्रिया के पहले चरण में लगी मशीन बरसों से खराब है। पंपिंग स्टेशन में तैनात कर्मियों को भी ये मालूम नहीं कि आखिरी बार मशीन कब चली थी।

अश्वनी खड्ड से आने वाले पानी को पंपिंग स्टेशन में सबसे पहले केमिकल चैंबर में डाला जाता है। इस चैंबर में पानी में चूना और फिटकरी डाली जाती है।

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पानी की सफाई पर कोई ध्यान नहीं

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इस कार्य के लिए केमिकल चैंबर में एक मशीन लगाई गई है। मशीन का काम चूना और फिटकरी को पानी में सही तरह से घुलाने का है लेकिन कई सालों से यह मशीन खराब है।

पानी के प्रेशर के दम पर ही आईपीएच महकमा इस कार्य को पूरा करने का दावा कर रहा है। ऐसे में अश्वनी खड्ड पेयजल योजना में पानी की सफाई की प्रक्रिया का पहला चरण ही संदेह के दायरे में है।

आईपीएच के अधिशासी अभियंता प्रीत मोहिंद्र सिंह का कहना है कि मशीन का काम पानी में फिटकरी डालने का है। इस काम को मैनुअल किया जा रहा है। जल्द ही मशीन को ठीक करवा लिया जाएगा।

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