अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेला: त्रिवेणी संगम पर हुआ मां-बेटे का भव्य मिलन, हजारों लोग बने साक्षी
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हिमाचल प्रदेश की अलौकिक और समृद्ध लोक संस्कृति के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय रेणुका उत्सव का गुरुवार को आगाज हुआ। हिमाचल प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सात से 12 नवंबर तक चलने वाले मेले का विधिवत शुभारंभ किया।
उन्होंने शोभायात्रा में देव पालकियों को कंधा दिया। ददाहू के खेल मैदान से रेणुकाजी के लिए शोभायात्रा शुरू हुई। करीब ढाई बजे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भगवान परशुराम की पालकी को कंधा देकर रेणुका के लिए रवाना किया।
उन्होंने बाजार में देवताओं संग पदयात्रा की। शोभायात्रा खेल मैदान से शुरू होकर ददाहू बाजार, गिरिपुल, बड़ोन, देवशिला व मेला मैदान से होते हुए शाम ढलने से पूर्व रेणुका जी तीर्थ के त्रिवेणी संगम पर पहुंची। जहां शाम को मां रेणुका का उनके पुत्र भगवान परशुराम के साथ भव्य मिलन हुआ।
हजारों लोग इस देव परंपरा के साक्षी बने। शोभायात्रा में भगवान परशुराम की पालकी आकर्षण का केंद्र रही। प्राकृतिक लोक वाद्य यंत्रों, शंख, घंटियाल, ढोल-नगाड़ों, बैंड बाजे के साथ निकाली गई शोभायात्रा में हजारों लोगों ने भाग लिया।
भगवान परशुराम के जयघोष से ददाहू गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा में भगवान परशुराम के प्राचीन जामू मंदिर, कटाह मंदिर, माशू देवता मंदिर और मंडलाह के मंदिरों से लाई गई देव पालकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
राजपरिवार ने निभाई परंपरा
अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के मद्देनजर कार्तिक शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को निकलने वाली शोभायात्रा सिरमौर राजवंश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। राजपरिवार इस परंपरा को वर्षों से निभाता चला आ रहा है।
राजपरिवार द्वारा भगवान परशुराम की अगवानी कर उनको पंडाल तक लाने की परंपरा सदियों पुरानी है। वीरवार को सिरमौर राजवंश के मुख्य सदस्य कंवर अजय बहादुर सिंह अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गिरि नदी के पावन संगम तट पर पहुंचे।
उन्होंने चांदी जड़ित भगवान परशुराम की पालकी का पूजा-अर्चना कर स्वागत किया। राज परिवार ने पारंपरिक वेशभूषा में भगवान परशुराम का स्वागत किया। इस मौके पर एमपी कंवर, बलभद्र सिंह सहित राजपरिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।