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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव: मंडी के पड्डल में उमड़ा आस्था का सैलाब, एक साथ विराजे 190 देवी-देवता

Thu, 03 Mar 2022 09:02 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Mar 2022 09:02 PM IST
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International Mahashivratri Festival: Flood of faith in Paddal mandi, 190 gods and goddesses sit together
पड्डल में उमड़ा आस्था का सैलाब। - फोटो : संवाद

अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में छोटी काशी मंडी गुरुवार को स्वर्ग लोक जैसी दिखी। मंडी के एतिंहासिक पड्डल का नजारा देवलोक से कम नहीं दिखा। यहां शिवरात्रि महोत्सव में पधारे करीब 190 पंजीकृत देवी-देवता कायदे और कतार में अपने-अपने स्थान पर बैठ देव समगाम की शोभा बढ़ाते रहे। देव ध्वनियों से पूरा पड्डल गूंजायमान रहा और श्रद्धारस में लीन हजारों भक्त देवी- देवाओं के सामने शीश झुकाकर आर्शीवाद लेते रहे। तो वहीं पड्डल मैदान में अलौकिक देव मिलन भी देखने को मिला। देवी-देवताओं की नाचती हुई पालकियों व रथों ने एक-दूसरे के साथ मिलन किया, जिसके हजारों लोग गवाह बने। लोग अपने अपने आराध्य देवी देवताओं के पास माथा टेका और मनौतियों को चढ़ाया। पौने बारह बजे  महामाया निहरी थुनाग, देव तुंगासी और देव चुंजवाला सराज घाटी के देवता अपने सैकड़ों देवलुओं सहित नाचते गाते हुए मेला स्थल पर पहुंचे।

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समय दोपहर 12 बजे, क्लस्टर विश्वविद्यालय परिसर के गेट पर सराज घाटी की माता मड भाखन अन्य देवी-देवताओं संग विराजमान रही। 12.10 मिनट, कॉलेज मैदान के पुराने स्थान पर पीपल वृक्ष के समीप सभी देवी देवता अपने यथावत स्थान पर बैठे रहे।  जिनमें देव बिट्ठू नारायण, देव माहूंनाग, बाला कामेश्वर बन्यूरी चच्योट, बनौली देव, भैरव देव, माता मैहणी बदार, काली चामुंडा, नैणा उग्रतारा, सहित अन्य देवी देवता यथावत स्थान पर बैठे।  समय साढ़े बारह बजे, देवता पुंडरिक ऋषि अपने देवलुओं सहित मैदान में पहुंचे, रंग बिरंगे परिधान पहने देवलु हाथों में रूमाल और तलवारें लेकर नाचते गाते मैदान में पहुंचे। हर कोई उल्लास में था। सांय साढ़े पांच बजे बारिश ने समागम में खलल पैदा किया। सभी देवी देवता अपने अपने देवलुओं संग ठहराव स्थलों के लिए रवाना हुए।

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