{"_id":"6339bfa2e9f6722a1410e51c","slug":"international-kullu-dussehra-2022-god-and-goddess-departure-dhalpur-maidan-kullu","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu Dussehra 2022: पूरे लाव-लश्कर के साथ देवताओं के महाकुंभ के लिए निकले देवता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu Dussehra 2022: पूरे लाव-लश्कर के साथ देवताओं के महाकुंभ के लिए निकले देवता
Sun, 02 Oct 2022 10:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 02 Oct 2022 10:13 PM IST
सार
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि जिले के दूरदराज के इलाकों के देवता अपने देवालय के कुल्लू की ओर निकल गए हैं। चार अक्तूबर शाम को तमाम देवी-देवता ढालपुर पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
लाव लश्कर के साथ रवाना हुए देवी-देवता।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का नगाड़ा बजने वाला है। उत्सव में भाग लेने के लिए जिला कुल्लू के सैकड़ों देवी-देवता पूरे लाव लश्कर के साथ रवाना हो गए हैं। रविवार को जिले के विभिन्न इलाकों के देवी-देवताओं ने अपने देवालय से दशहरा पर्व के लिए कूच किया। मंदिरों से रवाना हुए देवता चार अक्तूबर की शाम को ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविरों में पहुंचेंगे।
विज्ञापन
जिले के बाह्य सराज आनी, निरमंड के साथ सैंज, गड़सा, बजौरा, मणिकर्ण व मनाली आदि देवी-देवताओं की रथयात्रा शुरू हो गई है। बाह्य सराज आनी, निरमंड के देवताओं का पहला पड़ाव शुरू हो गया है और 150 से 200 किलोमीटर का पैदल सफर कर ही अपने अस्थायी शिविर पहुंचेंगे।
विज्ञापन
देवता खुडीजल, ब्यास ऋषि, कोट भझारी, टकरासी नाग, चोतरू नाग, शरशाई नाग, देवता चंभू रंदल तथा देवता चंभू कशोली बंजार क्षेत्र पहुंच गए हैं। सोने-चांदी के मुख मोहरों से सजे देवी-देवताओं के देवरथों का लोग भव्य स्वागत कर रहे हैं।
विज्ञापन
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि जिले के दूरदराज के इलाकों के देवता अपने देवालय के कुल्लू की ओर निकल गए हैं। चार अक्तूबर शाम को तमाम देवी-देवता ढालपुर पहुंच जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के आने पर भी देव परंपरा को पहले की तरह ही निभाया जाएगा।