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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आज से शुरू

Fri, 03 Oct 2014 08:46 AM IST
Updated Fri, 03 Oct 2014 08:46 AM IST
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international kullu dusherra.

ढोल करनाल और शहनाई की मंगल स्वर लहरियों के साथ निकलने वाली रधुनाथ की भव्य शोभा यात्रा के साथ शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा शुरू हो गया।। बलि प्रथा पर रोक के बावजूद तकरीबन सभी देवी-देवताओं ने कुल्लू के लिए प्रस्थान कर दिया है।

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कुछ ही देर में सभी देवी देवता रधुनाथ के पास सुलतानपुर में हाजरी भरेंगे जहां उन्हें पगड़ी देकर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। दोपहर तीन बजे रधुनाथ की भव्य शोभा यात्रा के साथ मेले का शुभारंभ हो जाएगा।
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मेले के शुभारंभ के मौके पर राज्यपाल उर्मिला सिंह मुख्यातिथि के रूम में मौजूद होगी। सात दिन तक चलने वाले इस मेले के लिए मेला कमेटी की ओर से 292 देवी देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है।
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बलि प्रथा रोकना होगी चुनौती

international kullu dusherra.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रशासन के लिए बलि प्रथा पर रोक लगाना प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौति रहेगी। क्योंकि कुछ देवी देवता कुल्लू पहुंचने पर बलि लेते है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के लिए कड़ी चुनौति रहेगी।

नजर बंद रहेगी श्रृंगा ऋषि और बालू नाग
रधुनाथ की दाईं ओर चलने के विवाद को लेकर श्रृंगा ऋषि और बालू नाग शोभा यात्रा के दौरान अपने अस्थाई शि‌विरों में नजर बंद रहते है। इस दौरान लगभग 50 पुलिस जवानों को मोर्चे पर लगाया गया होता है। दोनों में पिछले 20 सालों से अधिक समय से धुर विवाद चला हुआ है।

राजीव थापा देंगे प्रस्तुति

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मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश के गायक राजीव थापा अपनी प्रस्तुति देंगे। जबकि कार्यक्रम में राज्यपाल उर्मिला सिंह मुख्यातिथि के रूप में मौजूद होगी। वहीं नौ अक्तूबर को प्रदेश के मुख्यामंत्री वीरभद्र सिंह दशहरे के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।

इस मेले की खासियत ये है कि यहां सुई से लेकर कार तक दशहरा उत्सव में उपलब्ध रहती है। तीन से नौ अक्तूबर तक मनाए जाने वाले पर्व के दौरान देवभूमि कुल्लू शहर का नजारा महानगरों का स्वरूप ले लेता है।

देशभर के लोगों के आने से मेला स्थल लोगों की उमड़ी भीड़ से खचाखच भरे रहने से तिल तक धरने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है। दशहरा उत्सव के शोध के लिए आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रिया, इजराइल, न्यूजीलैंड, जर्मनी, स्विटजरलैंड सहित कई देशों के शोधार्थी यहां पहुंचते हैं।

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