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डॉक्टरों का खुलासा, मर्दों में बढ़ रही नपुंसकता की समस्या, ये रहे कारण

Fri, 08 Jul 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 08 Jul 2016 12:02 AM IST
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Infertility problem increasing in Men and Women in india.

मर्दों में इनफर्टिलिटी (नपुंसकता) की समस्या लगातार बढ़ रही है। शराब का अधिक सेवन, मानसिक तनाव, केमिकल फैक्ट्री में काम करना, टीबी इंफेक्शन नपुंसकता का कारण बन रहे हैं। मोहाली के फोर्टिस अस्पताल की डॉ. पूजा मेहता ने यह खुलासा शिमला में किया।

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उन्होंने बताया कि इनफर्टिलिटी के बढ़ते मामलों में पुरुषों के शरीर में शुक्राणु कम काउंट होना आम बात है। 30 फीसदी इनफर्टिलिटी (नपुंसकता) मामलों में यही वजह पाई गई है। इससे हिमाचल प्रदेश भी अछूता नही है। 40 फीसदी मामले पहाड़ी इलाकों से भी हैं।
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इसका इलाज आईसीएसआई, टीईएसए, पीआईसीएसआई और आईएमएसआई तकनीक से किया जा सकता है। और निसंतान दंपतियों को संतान मिल सकती है। मेल इनफर्टिलिटी में ज्यादा गर्म पानी से नहाना से मर्दों के शरीर में एब्सेंट शुक्राणु और शरीर में शुक्राणु का कम होना मुख्य वजह बताई है।

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नई तकनीक से गर्भ धारण करने में मिल रही सफलता

Infertility problem increasing in Men and Women in india.

इस कारण महिलाओं में गर्भ नही ठहर पाता है। फोर्टिस ब्लूम आईवीएफ सेंटर ऐसे लोगों के लिए इलाज में एक नई तकनीक लाई है। इसमें महिला की उम्र, गर्भाश्य की स्थिति, इनफर्टिलिटी की वजह, वीर्य की क्वालिटी और अंडाणु की कुल मात्रा परिणाम को बदल सकती है।

शुरूआत में अंडाणु लेकर पिंड गर्भ की फ्रीजिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में फ्रोजोन पिंड गर्भ को ट्रांसफर करने के लिए लेटेस्ट लेजर हैचिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद शुक्राणु को विकसित होने के बाद अंडाणु को चुनकर गर्भ में ट्रांसफर किया जाएगा।

आईवीएफ एक ऐसा तरीका है, जिसमें कि लेबोरेट्री डिश में शुक्राणू के साथ अंडे को जोड़कर रिप्रोडक्शन किया जाएगा। अंडा के उपजाऊ होने के बाद  दो से पांच दिनों के भीतर सेल डिवीजन शुरू होने के बाद उससे बनने वाले भ्रूण को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है।

इससे महिला गर्भधारण कर सकती है। 50 साल से कम आयु के लोगों के साथ आईवीएफ तकनीक अपनाई जा सकती है। जबकि 25 से 30 फीसदी इसमें कामयाबी पाई गई है।

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