अवैध खनन करते पकड़े व्यक्ति के परिजनों को नहीं मिलेगा अब पट्टा
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हिमाचल में अवैध खनन करने वालों के रिश्तेदारों को भी अब खनन के लिए पट्टा नहीं मिल सकेगा। खनन करते पकड़े गए व्यक्ति के परिजनों का ब्योरा तैयार कर उद्योग विभाग उन्हें भी ब्लैक लिस्ट करेगा। उसके परिवार का कोई सदस्य भविष्य में खनन के लिए पट्टा नहीं ले सकेगा।
प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नए नियम बनाकर सरकार ने अवैध खनन करते पकड़े जाने पर भारी जुर्माने के साथ जेल का प्रावधान किया। खनन माफिया पर और शिकंजा कसते हुए अब उनके परिजनों को भी ब्लैक लिस्ट करने का फैसला लिया है।
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह का कहना है कि इस संबंध में विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक खनन माफिया किसी न किसी रिश्तेदार के नाम पर खनन पट्टा लेकर आसपास के इलाके में खनन का कारोबार करता रहता था।
रायल्टी वसूली को करेंगे एक्ट में संशोधन
सिर्फ मोहरे बदल रहे थे, लेकिन अवैध खनन का खेल इन्हीं कानूनी पट्टों के नाम पर हो रहा था। अब इस रैकेट को तोड़ने के लिए विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि एक बार पकड़े जाने वाले व्यक्ति के परिवार को भी पट्टा ही नहीं मिल सकेगा।
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि रायल्टी पर कुंडली मारकर बैठे और जुर्माना भरने वाले क्रशर मालिकों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। डिफाल्टर क्रशर मालिकों से पैसा वसूलने के लिए किस्तों पर रायल्टी की रकम वसूलने की व्यवस्था की जाएगी।
इसके लिए माइनिंग एक्ट में संशोधन के लिए विचार किया जा रहा है। बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 120 के ऐसे क्रेशर मालिक हैं, जिन्हें डिफाल्टर घोषित किया गया है। ये लोग सरकार को मिलने वाली करोड़ों की रॉयल्टी के अलावा जुर्माना राशि पर कुंडली मारकर बैठे हैं।