इंडियन टेक्नोमेक कंपनी पर शिकंजा कसने की तैयारी, मांगा संपत्तियों का ब्योरा
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प्रदेश के सबसे बड़े घोटाले में नामित इंडियन टेक्नोमेक कंपनी पर सरकार और सीआईडी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीआईडी के घोटाले की जांच का दायरा पड़ोसी राज्यों तक पहुंचाने के बाद प्रदेश सरकार ने पड़ोसी सरकारों से सहयोग की मांग की है। साथ ही राज्यों से अपने यहां मौजूद कंपनी की संपत्तियों और औद्योगिक इकाइयों का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है।
साथ ही उनकी संपत्तियों की बिक्री बिना हिमाचल को बताए न कराने का भी आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार हिमाचल ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों की सरकारों से संपर्क साधकर कंपनी की संपत्तियों और कार्यालयों की जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा है।
दरअसल, अब तक की जांच में हजारों करोड़ों का घोटाला करने वाली कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने कई बेनामी संपत्तियां बनाई व देश-विदेश की कंपनियों में निवेश किया।
साथ ही हिमाचल के अतिरिक्त कंपनी के निदेशकों ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में भी बेनामी संपत्तियां खरीदने की बात कही जा रही है। ऐसे में संबंधित राज्यों की सरकारों से तालमेल स्थापित कर जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि कंपनी द्वारा किए गए घोटोले की भरपाई की जा सके।
2014 से चल रही मामलों की जांच
सिरमौर के नाहन में स्थापित इंडियन टेक्नोमेक कंपनी के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ 2014 में सीआईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला था कि आबकारी एवं कराधान विभाग, प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड और 1 दर्जन से अधिक बैंकों को करोड़ों की चपत लगाकर कंपनी प्रबंधन फरार हो गया।
आबकारी विभाग भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहा है, जबकि स्टेट सीआईडी कंपनी के घोटाले की अलग जांच कर रही है। हाल में सीआईडी ने बिजली बोर्ड को साढ़े चार करोड़ से अधिक का चूना लगाए जाने से जुड़े मामले में चालान पेश किया है।