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Shimla: मुख्यमंत्री से मिले बिजली बोर्ड कर्मचारी, बोले- फरवरी से पहले ओपीएस करें बहाल
Thu, 18 Jan 2024 07:32 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 18 Jan 2024 07:32 PM IST
सार
ओकओवर शिमला में करीब आधा घंटा चली बैठक के दौरान समिति ने बोर्ड में स्थायी प्रबंध निदेशक नियुक्त करने की मांग भी की। मुख्यमंत्री ने वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने की बात कही।
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बिजली कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर फरवरी से पहले ओपीएस बहाल करने ही मांग की। ओकओवर शिमला में करीब आधा घंटा चली बैठक के दौरान समिति ने बोर्ड में स्थायी प्रबंध निदेशक नियुक्त करने की मांग भी की। मुख्यमंत्री ने वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार बोर्ड के कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में सभी मांगों पर विचार करने के लिए बैठक करने का आश्वासन भी दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किया जा रहा है। सरकार कर्मचारियों के हितों के संरक्षण के लिए सदैव संवेदनशील रही है और उनके कल्याण के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। बोर्डों, निगमों और अन्य संस्थानों की वित्तीय स्थिति और कार्यप्रणाली को सशक्त किया जा रहा है। प्रदेश सरकार विद्युत बोर्ड की आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों की रक्षा व उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में समिति के संयोजक इंजीनियर लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरालाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन प्रदेश सरकार की तर्ज पर वर्ष 1974 से है। प्रदेश सरकार द्वारा पेंशन नियमों में किए गए सभी संशोधन बोर्ड में लागू किए गए हैं। पुरानी पेंशन लागू करने के बारे में इस संशोधन को बोर्ड में लागू करने में की जा रही अनावश्यक देरी से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
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उन्होंने कहा कि इस बाबत देरी से बहुत सारी तकनीकी दिक्कतें खड़ी हो जाएगी। आयकर वर्ष फरवरी तक रहता है। इससे पहले कर्मचारियों से कटे हुए शेयर, जो अभी बोर्ड के पास हैं, को या तो एनएसएलडी के पास जमा करना पड़ेगा या इसको कर्मचारियों को वापस करना पड़ेगा। ऐसे में पुरानी पेंशन को फरवरी से पहले लागू किया जाए। वर्तमान में बोर्ड में 6500 कर्मचारी नई पेंशन में हैं। पुरानी पेंशन लागू करने से बोर्ड पर और कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। नई पेंंशन को लेकर काटे जा रहे शेयर से बहुत कम खर्चा होगा। समिति ने कहा कि बिजली बोर्ड में अधिकतर समस्याएं स्थायी प्रबंध निदेशक के न होने के कारण खड़ी हुई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, संयुक्त संघर्ष समिति से लक्ष्मण काप्टा सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
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