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जानिए क्या थे खुशवंत सिंह के आखिरी संवाद?

Thu, 09 Oct 2014 11:53 AM IST
Updated Thu, 09 Oct 2014 11:53 AM IST
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In Kasauli Tomorrow 'on The Legend Livs' Released

‘द लेजेंड लिवस ऑन’ खिताब का विमोचन 10 अक्तूबर को तीन बजे कसौली से होगा। कसौली से उनकी लेखनी की डोर ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ से लेकर उनकी अंतिम किताब ‘द गुड द बैड एंड द रिडिक्लस’ तक जुड़ी रही।

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किताब का विमोचन जानी मानी लेखिका शोभा डे, ऑथर अशोक चोपड़ा, फकीर एजाजुदीन और खुद राहुल सिंह करेंगे। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट 12 अक्तूबर तक कसौली क्लब में चलेगा।
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कई हस्तियां पहुंचेंगी
10 अक्तूबर से शुरू होने वाले खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में देश भर के साहित्यकारों का जमावड़ा लगने जा रहा है। मुख्य रूप से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी तमन सिंह, नोबेल पुरस्कार से अलंकृत डॉ. आरके पचौरी और अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा यहां मौजूद रहेंगी।

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ये ‌थे अंतिम संवाद

In Kasauli Tomorrow 'on The Legend Livs' Released

...तुम्हें पता है कि मैं 99 साल का हूं। मैंने जवाब दिया ‘काश मेरे जीवन के बचे साल भी आपकी उम्र में जुड़ जाएं’। उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा ‘तुम भी उतना जियो जीतना मैं जिया’।

मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और चूमा, वो हाथ जो किताबें और अनोखे लेख लिखता रहा। उन्होंने अपने गाल के साथ मेरे गाल पर स्पर्श किया। हम दोनों जानते थे कि यह विदाई है। मैंने उन्हें छोड़ा और ऐसा प्रतीत हुआ कि मैं बाहर मानो नुकीली बजरी पर खड़ा हूं। पटियाला पैग का पब्लिकेशन अब नहीं रहा। लेकिन हम लेखनी की मशाल उठाए रखेंगे।

हम शुक्रगुजार हैं सरदारजी के, जिन्होंने अपनी लेखनी के जरिए पाठकों को पाखंडी और नकली जीवन से दूर रखा। हमें खुद पर हंसने को मजबूर किया और कहा कि दकियानूसी नियमों को कचरे के डिब्बे में डालो..जीना इसी का नाम है।

राहुल सिंह ने बताया क्या कहा था खुशवंत सिंह ने

In Kasauli Tomorrow 'on The Legend Livs' Released

सदी के महान लेखक खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने आने वाली किताब ‘द लैजेंड लीवस ऑन’ के बारे में अमर उजाला के साथ खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि कैसे अंतिम दिन वह अपने महान पिता से बात करते वक्त भावुक हो गए थे। इसका जिक्र उन्होंने अपनी इस नई किताब में किया है।

वे बुधवार को कसौली में 10 अक्तूबर से शुरू होने वाले खुशवंत सिंह लिटफेस्ट की तैयारियों के लिए पहुंचे हैं। इस किताब की भूमिका उन्होंने खुद लिखी है। इसमें जिंदगी के उन लम्हों को सार्वजनिक किया है, जो उनके और उनके पिता के बीच आखिरी संवाद के रूप में ताउम्र उनके साथ रहेंगे।

खुशवंत सिंह अब नहीं हैं। परंतु उनकी अद्भुत लेखनी को जिंदा रखने के लिए दुनिया भर के लेखक आगे आए हैं। इस किताब में देश-दुनिया के लेखकों ने खुशवंत सिंह से जुड़ी यादों को साझा किया है।

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