गहरी नींद में ऐसा क्या हुआ कि हो रही मौतें?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में सावन माह के दौरान सांप लोगों को मौत की नींद सुला रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि सभी मामलों में एक ही तरह से लोग सांप का शिकार बन रहे हैं।
ऐसे में अब लोग भी कहने लगे हैं कि कहीं सांप रूष्ट तो नहीं है। हालांकि ऐसा नहीं है कि पहली बार बरसात में सर्पदंश के मामले सामने आए हों।
मगर जिस तरह से दो दिनों के दौरान तीन लोगों को सांप ने काल का ग्रास बनाया यह सभी को हैरान करने वाला है।
सो रही थी मासूम सांप ने काटा, मौत
थाना सदर नाहन के तहत पंचायत नेहली धीड़ा के गांव डमोर में बीती रात सर्पदंश से 12 वर्षीय अंजना कुमारी की मौत हो गई। लड़की स्कूल में 7वीं कक्षा की छात्रा थी। वह रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने गई। तड़के कमरे में जहरीला सांप घुस गया।
मौका पाते ही उसने लड़की को डंस लिया। इसके बाद सुबह 6 बजे लड़की की मौत हो गई। उधर नेहली धीड़ा पंचायत प्रधान शालिनी शर्मा ने पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश से लड़की की मौत हुई है। पंचायत इस मामले को उपायुक्त विकास लाबरू के समक्ष रखा है। पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
सोलन में सो रही बच्ची को नाग ने डंसा
दो दिन पूर्व ही सोलन जिला के सबाथु में आठ वर्षीय बच्ची को भी सोते समय नाग ने डंस दिया। इससे हसीना नाम की इस बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई।
उ परिजनों के मुताबिक देर रात बच्ची ने पांव में दर्द होने की बात कही। पिता ने लाइट जलाई तो देखा कि एक सांप घर से बाहर निकल रहा है। इसके बाद बच्ची के मुंह से झाग निकलना शुरू हो गया और थोड़ी देर में ही उसने दम तोड़ दिया।
कांगड़ा में सो रहा था अधेड़, सांप ने काटा
कांगड़ा जिला की रे पंचायत में भी तीन दिन पूर्व एक शख्स को नाग ने ठीक वैसे ही शिकार बनाया जैसे की पहले दो मामलों में हुआ।
इस मामले में भी 50 वर्षीय अशोक कुमार घर में सो रहा था। इसी दौरान सांप ने बिस्तर पर ही उसे डंस दिया। हालांकि उक्त शख्स ने इसके बाद सांप को फौरन मौत के घाट उजार दिया और समीप के ही पंजपीर मंदिर में माथा टेककर सो गया।
मगर थोड़ी देर बाद ही उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई। तीनों मामलों पर गौर करें तो मौत की वजह से लेकर परिस्थितियां भी एक जैसी ही थी। ऐसे में अब लोग इसे आस्था से जोड़कर भी देख रहे हैं।