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Lumpy skin disease: हिमाचल में लंपी से बचाव के लिए 1.21 लाख गायों को लगाई वैक्सीन

Sat, 03 Sep 2022 09:57 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Sep 2022 09:57 PM IST
सार

पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि पशुपालन विभाग स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए है और साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के आसपास पांच किमी के दायरे में रोग प्रतिरोधी टीकाकरण किया जा रहा हैं। 

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In Himachal, 1.21 lakh cows were vaccinated to prevent Lumpy skin disease
लंपी स्किन रोग - फोटो : संवाद

विस्तार

 राज्य में गायों को लंपी वायरस से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर अभियान छेड़ा है। इसके तहत पशुधन को बचाने के लिए हरसंभव प्रयत्न किए जा रहे हैं। पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि पशुपालन विभाग स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए है और साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के आसपास पांच किमी के दायरे में रोग प्रतिरोधी टीकाकरण किया जा रहा हैं। अब तक 1,21,080 गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जो निरंतर जारी है। प्रदेश के सभी जिलों से इस रोग के बारे में प्रतिदिन सूचना एकत्रित कर केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। विभाग बीमारी से संबंधित टीकाकरण, पशु की मृत्यु तथा संक्रमण दर इत्यादि का विवरण विभागीय वेबसाइट पर प्रतिदिन अपडेट कर रहा है।

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कहा कि सभी जिलों में रोगी पशुओं के उपचार के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं और वैक्सीन खरीदने के लिए जिला स्तर पर 12 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि जारी कर दी गई है। विभागीय बजट से भी दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। मंत्री ने कहा कि समस्त जिला उप-निदेशकों को संबंधित जिला के उपायुक्त से मिलकर पीड़ित गोवंश के उपचार एवं बीमारी की रोकथाम के बारे में प्रचार-प्रसार के लिए वाहन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों को स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विभिन्न स्थानों पर मक्खी-मच्छर की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाइयों को छिड़काव करवाने को भी कहा गया है।  कहा कि अब तक प्रदेश के नौ जिलों में कुल 44,022 पशु इस रोग से ग्रस्त पाए गए हैं। इनमें से 1,623 गोवंश की मृत्यु दर्ज की गई है। अब तक 14,820 ठीक हो चुके है। प्रदेश सरकार टीकाकरण एवं बीमार पशु का उपचार निशुल्क कर रही है।
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क्या है लंपी रोग
लंपी चमड़ी रोग अत्यंत संक्रामक रोग है। यह विषाणु जनित रोग संक्रमित पशु के संपर्क में आने व मक्खी अथवा मच्छर के संक्रमित पशु को काटने के बाद स्वस्थ पशु को काटने से फैलता है। पशु में बीमारी के लक्षण देखते ही पशु पालक नजदीकी पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क करें तथा अपने स्वस्थ पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए बीमार पशुओं से अलग कर दें।

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लंपी वायरस से मरने वाले पशुओं की संख्या घटकर 115 पहुंची

प्रदेश में लंपी स्किन वायरस से मरने वाले पशुओं की संख्या शनिवार को घटकर 115 पहुुुंच गई। प्रदेश में अभी तक कुल 1,758 पशुओं की मौत इस वायरस से हो चुकी है। वायरस की चपेट में आने के बाद तेज बुखार आने से पशु दूध देना बंद कर रहे हैं या फिर दूध कम देने लगे हैं।  कमजोर पशु पर वायरस की मार ज्यादा पड़ती है। पशुओं में यह वायरस करीब बीस दिन तक रहता है और इसके बाद पशु ठीक होने लगते हैं।

जिला कांगड़ा में अभी लंपी स्किन वायरस से ग्रसित पशुओं की संख्या बढ़ी है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में शनिवार को लंपी स्कि न वायरस की चपेट में आए पशुओं की कुल संख्या 46,563 तक पहुंच गई है, जबकि कुल 115 पशुओं की मौत हो गई। अभी तक प्रदेश में कुल 1,758 पशुओं की बीमारी से मौत हो चुकी है। कुल 16,020 पशु वायरस को मात देकर ठीक हो चुके हैं। 

मिल्क फेडरेशन के प्लांटों में हर रोज पहुंच रहा जरूरत का दूध  
हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष निहाल चंद कहते हैं कि फेडरेशन के पास हर रोज 1.30 लाख लीटर दूध दत्तनगर, मंडी, नाहन, नालागढ़, कांगड़ा और ऊना के संयंत्रों में पहुंच रहा है। लंपी स्किन वायरस के बाद भी दूध की आपूर्ति में फिलहाल कई कमी नहीं आई है।  

वायरस से निपटने को वैक्सीन मुफ्त, पैसे वसूले तो कार्रवाई
प्रदेश पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा कहते हैं कि लंपी स्किन वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन की 92,095 डोज उपलब्ध हैं। शनिवार को पशुओं की मौत कम हुई है। कांगड़ा में अभी सुधार नहीं हुआ है, जबकि अन्य जिलों में सुधार हो रहा है। हैदराबाद की कंपनी से वैक्सीन आ रही है और अलग-अलग सप्लायर आपूर्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि पशुओं में वैक्सीन मुफ्त लगा रहे हैं। अगर कोई पैसे ले रहा है तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। 

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