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Shimla News: चेक बाउंस मामले में 3 महीने का कारावास
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का फैसला
2.40 लाख रुपये जुर्माना भी चुकाना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में चमन लाल को दोषी करार देते हुए तीन माह की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 2.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। आरोपी चमन लाल, ग्राम काॅजेल, पोस्ट ऑफिस रौरी, तहसील शिमला निवासी ने 2020 में जनरल स्टोर स्थापित करने के लिए ऋण लिया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने कसुम्पटी स्थित हिमाचल अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से 5 लाख रुपये की ऋण सुविधा का लाभ लिया था। ऋण स्वीकृत के बाद सात सालों के भीतर 84 समान मासिक किस्तों में छह प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ चुकाने पर सहमति बनी थी। इसी दौरान आरोपी किस्तों को चुकाने में असमर्थ हो गया। इस कारण उसके ऋण खाते में बड़ी राशि बकाया हो गई। 7 जनवरी 2020 को आरोपी ने ऋण चुकाने के लिए निगम के पक्ष में 2.16 लाख की राशि का चेक जारी किया, लेकिन 25 फरवरी को राज्य सहकारी बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद 19 मार्च को आरोपी को राशि के भुगतान करने के लिए 15 दिनों की अवधि के भीतर कानूनी नोटिस भी जारी किया। आरोपी निर्धारित समय के भीतर चेक राशि का भुगतान करने में विफल रहा। 30 जुलाई को कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत अदालत के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते फैसला सुनाया है।
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2.40 लाख रुपये जुर्माना भी चुकाना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में चमन लाल को दोषी करार देते हुए तीन माह की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 2.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। आरोपी चमन लाल, ग्राम काॅजेल, पोस्ट ऑफिस रौरी, तहसील शिमला निवासी ने 2020 में जनरल स्टोर स्थापित करने के लिए ऋण लिया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने कसुम्पटी स्थित हिमाचल अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से 5 लाख रुपये की ऋण सुविधा का लाभ लिया था। ऋण स्वीकृत के बाद सात सालों के भीतर 84 समान मासिक किस्तों में छह प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ चुकाने पर सहमति बनी थी। इसी दौरान आरोपी किस्तों को चुकाने में असमर्थ हो गया। इस कारण उसके ऋण खाते में बड़ी राशि बकाया हो गई। 7 जनवरी 2020 को आरोपी ने ऋण चुकाने के लिए निगम के पक्ष में 2.16 लाख की राशि का चेक जारी किया, लेकिन 25 फरवरी को राज्य सहकारी बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद 19 मार्च को आरोपी को राशि के भुगतान करने के लिए 15 दिनों की अवधि के भीतर कानूनी नोटिस भी जारी किया। आरोपी निर्धारित समय के भीतर चेक राशि का भुगतान करने में विफल रहा। 30 जुलाई को कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत अदालत के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते फैसला सुनाया है।
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