हिमाचल के इन बहादुर बेटों के कंधे पर सजे सितारे, पढ़िए इनके संघर्ष की कहानी
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पुराना कांगड़ा के बेटे ने भारतीय सेना में अफसर बनकर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। लेफ्टिनेंट बने मयूर मेहरा को पहली तैनाती कपूरथला में मिली है। आईएमए देहरादून में पासिंग आउट परेड के बाद पिता रविंद्र मेहरा और माता नीता ने अपने बेटे के कंधों पर सितारे लगाकर उसे देश सेवा के लिए समर्पित किया। बहन कनिका भी इन ऐतिहासिक लम्हों की गवाह बनीं।
मयूर के दादा स्वर्गीय ज्ञान चंद भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। मयूर की प्रारंभिक शिक्षा जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा में हुई। इसके बाद 12वीं तक की शिक्षा सैनिक स्कूल सुजानपुर से हासिल की।
पहली कोशिश में ही मयूर एनडीए में चयनित हो गए। मयूर के पिता रविंद्र मेहरा स्वास्थ्य विभाग से बतौर सुपरवाइजर रिटायर हुए हैं। माता नीता देवी स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर हैं। बहन कनिका एमटेक हैं। उधर, रविवार को घर पहुंचने पर क्षेत्रवासियों ने उत्साह के साथ मयूर का स्वागत किया।
सैनिक संदीप धीमान बने लेफ्टिनेंट
उपमंडल की चोबीन पंचायत के मढ गांव निवासी संदीप धीमान ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर प्रदेश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। संदीप देहरादून स्थित भारतीय सेना अकादमी से पास आउट हुए हैं। संदीप धीमान 21 पैरा कमांडो के रूप में असम के झुराट में सेवाएं देंगे।
संदीप शुरुआत से ही मेहनती रहे हैं। धर्मशाला के योल आर्मी स्कूल से 12वीं करने के बाद भारतीय सेना में सिपाही के रूप में भर्ती हुए और तीन साल के बाद सेना में एसीसी कमीशन प्राप्त किया।
संदीप धीमान के पिता कुशल धीमान भारतीय सेना से कैप्टन सेवानिवृत्त हुए हैं। संदीप की माता संतोष कुमारी गृहिणी हैं, जबकि बहन शालू फैशन डिजाइनिंग कर गुरुग्राम में कार्यरत हैं। उनकी उपलब्धि पर राजेश राणा, कुसुम राणा, गायत्री देवी, रिस्व पांडव, रणजीत सिंह, प्रीतम कटोच, पंडित अमर नाथ और कैप्टन जगदीश राणा ने खुशी जताई है।
अरमान बने लेफ्टिनेंट, 26 मद्रास रेजिमेंट में देंगे सेवाएं
फतेहपुर की गोलवां पंचायत के सकरी निवासी अरमान कालिया लेफ्टिनेंट बने हैं। अरमान कालिया के पिता एसके कालिया लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में पासिंग आउट परेड के बाद अरमान की तैनाती 26 मद्रास रेजिमेंट में हुई है।
अरमान के पिता 14 डोगरा राइफल सुबाथू (हिमाचल) में लेफ्टिनेंट कर्नल सीआरओ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि माता प्रोमिला कालिया गृहिणी हैं। बड़ी बहन साक्षी एमटेक हैं। अरमान की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल से हुई। 12वीं अहमदनगर आर्मी पब्लिक स्कूल से की।
अरमान अपने पिता की तरह सेना में उच्च अधिकारी के रूप में सेवाएं देना चाहते थे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, परिजनों और दादा प्रकाश कालिया को दिया। अरमान के दादा प्रकाश कालिया ने शिक्षक के रूप में लगभग 40 वर्ष सेवाएं देकर कई बच्चों को उच्च पदों पर पहुंचाया। 87 वर्षीय दादा प्रकाश कालिया अपने पोते अरमान कालिया की इस सफलता से गदगद हैं।
प्राक्रम बने सेना में लेफ्टिनेंट
क्षेत्र के प्राक्रम सिंह चौहान सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात हुए हैं। भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में 8 जून को पासिंग आउट परेड में चयनित प्राकम सिंह अब श्रीनगर से बतौर अधिकारी अपनी सेवाएं देंगे। प्राक्रम ने 2009 से सेना में जवान पद पर कार्यरत रहकर 2015 में कमीशन प्राप्त करके भारतीय सैन्य अकादमी में प्रवेश किया है। उन्होंने कठोर मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया है।
प्राक्रम सिंह ने भारतीय थल सेना अध्यक्ष स्वर्ण पदक जीतने के पश्चात अकादमी में इन्हें जसारे कंपनी का सीनियर अंडर ऑफिसर नियुक्त किया गया। कोटली के प्राकम सिंह चौहान पुत्र नोता राम चौहान ने थल सेना में लेफ्टिनेट बनकर तुंगल क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और रिश्तेदारों को दिया है। प्राक्रम के लेफ्टिनेंट बनने से तुंगलघाट क्षेत्र में खुशी की लहर है।
अखिल बने लेफ्टिनेंट
अरनियाला लोअर के अखिल बैंस लेफ्टिनेंट बने हैं। अखिल बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे। डीएवी पब्लिक स्कूल ऊना से 12वीं के बाद उनका चयन एनडीए के लिए हो गया था। तीन साल बौद्धिक व शारीरिक मेहनत के साथ उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन भी पूरी की। पिछले एक साल के ज्यादा समय से आईएमए देहरादून में कड़े परिश्रम से उन्हें इंडियन आर्मी में ऑफिसर के तौर पर नियुक्ति मिली है।
पिता कश्मीर सिंह बैंस शिक्षा विभाग में हेडमास्टर तथा माता उपिंदर कौर प्रवक्ता हैं। पासिंग आउट परेड के दौरान माता-पिता ने बेटे के कंधों पर जिम्मेदारी के सितारे लगाए तो दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। बहन हिमानी बैंस और भाई निखिल बैंस भी इन पलों के गवाह बने। अखिल के प्रेरणास्रोत उनके नाना सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर स्वर्गीय चरण सिंह हैं।
मिस्त्री का बेटा पहले बना सिपाही, फिर हासिल किया कमीशन
नूरपुर उपमंडल की सुखार पंचायत के सुखार भराणा के मिस्त्री के बेटे संजीव कुमार सेना में पहले सैनिक बने फिर एसीसी परीक्षा पास कर कमीशन हासिल किया। शनिवार को देहरादून से पासआउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट पद हासिल किया है। संजीव कुमार आईएमए देहरादून में अपने बैच में सातवें स्थान पर रहे हैं।
संजीव कुमार की उपलब्धि से उसके माता-पिता सहित क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। संजीव कुमार की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई है। संजीव ने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई राजकीय उच्च पाठशाला सुखार और 12वीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजा का तालाब से वाणिज्य संकाय से पास की। देश सेवा का जज्बा लिए संजीव 2010 में आठ डोगरा में बतौर सिपाही भर्ती हुए।
बाद में उन्होंने कड़ी मेहनत से सेना में कमीशन हासिल किया। साधारण परिवार में जन्मे संजीव कुमार के पिता केवल सिंह मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि माता ऊषा देवी गृहिणी हैं। संजीव का एक छोटा भाई राकेश कुमार भी है। संजीव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों और गुरुजनों को दिया है।