{"_id":"6ae0b1d71f5b52f2b70609b5","slug":"iit-roorkee-has-sought-records-regarding-the-tunnel-being-constructed-in-the-chalonthi-area-shimla-news-c-19-sml1002-811054-2026-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: चलौंठी क्षेत्र में बन रही टनल का \nआईआईटी रुड़की ने मांगा रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: चलौंठी क्षेत्र में बन रही टनल का आईआईटी रुड़की ने मांगा रिकॉर्ड
विज्ञापन
अभी बंद पड़ा है टनल का निर्माण कार्य
मकानों में आई दरारों के कारणों का होगा खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कैथलीघाट-ढली फोरलेन के तहत भट्ठाकुफर-चलौंठी में बन रही ट्वीन टनल का आईआईटी रुड़की की टीम ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूरा रिकॉर्ड मांगा है। जिला प्रशासन एनएचएआई से रिकॉर्ड प्राप्त करने के बाद इसे आईआईटी रुड़की को सौंपेगा।
शांति विहार में 14 मकानों में दरारें आने के बाद स्थानीय लोगों के विरोध के चलते अभी टनल का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। प्रभावित भवन मालिकों की संघर्ष समिति ने आईआईटी रुड़की की टीम को बुलाकर मकानों में दरारें आने के वास्तविक कारणों का पता लगाने की मांग की है। इसके लिए जिला प्रशासन ने टीम के दौरे के लिए पांच लाख रुपये की राशि पहले ही जमा करवा दी है। अब एलाइनमेंट से संबंधित रिकॉर्ड आईआईटी रुड़की को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति को भी आईआईटी की टीम के निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। समिति को उम्मीद है कि रिपोर्ट में 14 से 15 भवनों में दरारें आने के कारणों का खुलासा होगा। एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आईआईटी रुड़की की टीम एक बार क्षेत्र का दौरा कर चुकी है। दरारों के कारणों का पता लगाने के लिए टीम के दोबारा दौरे की मांग के बाद इसके लिए निर्धारित पांच लाख रुपये की राशि जमा करवा दी है। अब आईआईटी ने फोरलेन का निर्माण कर रहे एनएचएआई से टनल के एलाइनमेंट का रिकॉर्ड मांगा है। एनएचएआई से रिकॉर्ड मिलने के बाद इसे आईआईटी रुड़की को उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
विज्ञापन
कार्य की टीम कर चुकी है मार्किंग
ट्वीन टनल निर्माण का विरोध होने के बाद प्रशासन ने काम पूरी तरह रुकवा दिया है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने आशंका जताई थी कि टनल के अंदर खोदाई का काम जारी है। इसके बाद 22 अक्तूबर को प्रशासन की ओर से गठित अधिकारियों की समिति ने टनल के अंदर अब तक हुए निर्माण कार्य की मार्किंग पूरी कर ली। स्थानीय पार्षदों और संघर्ष समिति के सदस्यों को टनल के अंदर हुए कार्य की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए निर्माण कंपनी की ओर से खुली छूट दी है। संघर्ष समिति करीब 500 घरों के नीचे से गुजरने वाली इस समानांतर टनल का निर्माण पूरी तरह बंद करने और पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण करने की मांग पर अड़ी हुई है।
विज्ञापन
मकानों में आई दरारों के कारणों का होगा खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कैथलीघाट-ढली फोरलेन के तहत भट्ठाकुफर-चलौंठी में बन रही ट्वीन टनल का आईआईटी रुड़की की टीम ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूरा रिकॉर्ड मांगा है। जिला प्रशासन एनएचएआई से रिकॉर्ड प्राप्त करने के बाद इसे आईआईटी रुड़की को सौंपेगा।
शांति विहार में 14 मकानों में दरारें आने के बाद स्थानीय लोगों के विरोध के चलते अभी टनल का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। प्रभावित भवन मालिकों की संघर्ष समिति ने आईआईटी रुड़की की टीम को बुलाकर मकानों में दरारें आने के वास्तविक कारणों का पता लगाने की मांग की है। इसके लिए जिला प्रशासन ने टीम के दौरे के लिए पांच लाख रुपये की राशि पहले ही जमा करवा दी है। अब एलाइनमेंट से संबंधित रिकॉर्ड आईआईटी रुड़की को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
विज्ञापन
फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति को भी आईआईटी की टीम के निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। समिति को उम्मीद है कि रिपोर्ट में 14 से 15 भवनों में दरारें आने के कारणों का खुलासा होगा। एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आईआईटी रुड़की की टीम एक बार क्षेत्र का दौरा कर चुकी है। दरारों के कारणों का पता लगाने के लिए टीम के दोबारा दौरे की मांग के बाद इसके लिए निर्धारित पांच लाख रुपये की राशि जमा करवा दी है। अब आईआईटी ने फोरलेन का निर्माण कर रहे एनएचएआई से टनल के एलाइनमेंट का रिकॉर्ड मांगा है। एनएचएआई से रिकॉर्ड मिलने के बाद इसे आईआईटी रुड़की को उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
विज्ञापन
कार्य की टीम कर चुकी है मार्किंग
ट्वीन टनल निर्माण का विरोध होने के बाद प्रशासन ने काम पूरी तरह रुकवा दिया है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने आशंका जताई थी कि टनल के अंदर खोदाई का काम जारी है। इसके बाद 22 अक्तूबर को प्रशासन की ओर से गठित अधिकारियों की समिति ने टनल के अंदर अब तक हुए निर्माण कार्य की मार्किंग पूरी कर ली। स्थानीय पार्षदों और संघर्ष समिति के सदस्यों को टनल के अंदर हुए कार्य की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए निर्माण कंपनी की ओर से खुली छूट दी है। संघर्ष समिति करीब 500 घरों के नीचे से गुजरने वाली इस समानांतर टनल का निर्माण पूरी तरह बंद करने और पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण करने की मांग पर अड़ी हुई है।