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Shimla News: एस्मा की परवाह किए बिना सैहब कर्मी हड़ताल पर गए , घरों से नहीं उठा कूड़ा

Fri, 15 May 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 11:59 PM IST
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Ignoring the ESMA, the workers went on strike and did not collect garbage from the houses.
उपायुक्त कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर किया प्रदर्शन, नगर निगम ने हड़ताल को अवैध करार दिया
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कर्मचारियों को तत्काल ड्यूटी पर लौटने के दिए निर्देश
कर्मी बोले, दस फीसदी वेतन वृद्धि बहाल करे नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एस्मा लागू होने के बावजूद सैहब सोयायटी के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इस वजह से शुक्रवार को शहर के हजारों घरों और व्यावसायिक संस्थानों से कूड़ा नहीं उठा। इस दौरान सोसायटी के कर्मचारियों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया।
सैहब सोसायटी के कर्मचारी नगर निगम से दस फीसदी वेतन बढ़ोतरी के फैसले को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। सोसायटी के कर्मचारियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं उनकी हड़ताल जारी रहेगी। स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से नगर निगम की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। नगर निगम ने कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध करार दिया है। नगर निगम आयुक्त ने सभी कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। सैहब सोसायटी के 800 कर्मचारी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इसमें घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी, सुपरवाइजर, सड़क सफाई कर्मी और चालकों सहित सभी सैहब कर्मी शामिल हैं।
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उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर हुए प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव बालक राम, विवेक कश्यप, यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह, महासचिव ओमप्रकाश गर्ग, उपाध्यक्ष अमित भाटिया समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि कटौती के निर्णय की कड़ी निंदा की और इसे नगर निगम प्रशासन की तानाशाही करार दिया। उन्होंने कहा कि दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि की एवज में घोषित किए तीन प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) से हर मजदूर के वेतन में हर महीने सात सौ रुपये से एक हजार रुपये का नुकसान होगा। इसके खिलाफ सैहब कर्मियों से निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया है। कर्मचारियों ने नगर निगम शिमला प्रशासन पर मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने मांग की कि यह तीन प्रतिशत डीए दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि के अलावा होना चाहिए था। नगर निगम प्रशासन ने ढाई करोड़ रुपये का बेवजह क्यूआर कोड पर खर्च किया है। इससे 150 नए मजदूरों को रोजगार दिया जा सकता था और कर्मियों पर काम का बोझ कम किया जा सकता था। सैहब सोसायटी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक हम काम पर नहीं लौटेंगे। उपायुक्त कार्यालय के बाहर शनिवार को सुबह 10:30 बजे से प्रदर्शन आज की तरह ही चलता रहेगा।
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टैक्स बढ़ाकर वेतन घटा दिया : मेहरा
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि हर वर्ष जनता की कूड़े, पानी और प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में दस प्रतिशत बढ़ोतरी की जा रही है लेकिन इस पैसे को बेहद मुश्किल काम करने वाले सैहब कर्मियों पर खर्च करने के बजाय नगर निगम अधिकारी फिजूल खर्ची में इस्तेमाल कर रहे हैं। सैहब कर्मियों पर पिछले कुछ सालों में काम का बोझ चार गुना तक बढ़ा दिया है। घरों की संख्या 80 से बढ़ाकर 300 तक कर दी है लेकिन उनका वेतन बढ़ाने के बजाय दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को खत्म कर तीन प्रतिशत डीए लागू कर दिया है।
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