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आईजीएमसी में अब और ढीली करनी होगी जेब, आरकेएस की बैठक में हुए ये बड़े फैसले

Thu, 04 Jul 2019 03:55 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 04 Jul 2019 03:55 PM IST
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IGMC rogi kalyan samiti Meeting Big decisions in shimla
फाइल फोटो

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में अब मरीजों के टेस्ट महंगी दरों पर होंगे। वीरवार को रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह फैसला लिया गया। अस्पताल में उपचार करवाने आने वाले मरीजों को एचबी, लिपिड प्रोफाइल, थॉयरायड, शुगर और यूरिया टेस्ट महंगी दरों पर करवाने होंगे। 

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प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में रोगी कल्याण समिति (गवर्निंग बॉडी) की बैठक कमेटी के चेयरमैन एवं स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक के दौरान अस्पताल में होने वाले विभिन्न टेस्टों के रेट बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
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टेस्ट के रेट बढ़ने के बाद अस्पताल आने वाले हजारों रोगियों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा। बैठक में स्पेशल वार्ड के वीआईपी रूम के चार्जिज भी बढ़ाए गए हैं। वीआईपी रूम लेने वाले मरीजों को अब एक दिन के 2 हजार की जगह 2250 रुपये चुकाने होंगे। आयुष्मान हिमकेयर, बीपीएल, एचआईवी, टीबी, कैंसर, सीनियर सिटीजन और हादसे में घायल मरीजों के टेस्ट फ्री में ही होंगे।
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सरकार से मिलेगी 1.70 करोड़ की ग्रांट
आईजीएमसी ने वीरवार को 2019-20 का बजट भी पेश किया। इसमें अनुमानित आय 6345 लाख रुपये बताई। अनुमानित व्यय 6515 दर्शाया गया है। इसमें एक करोड़ 70 लाख रुपये की ग्रांट इन एड सरकार देगी। इसको लेकर बैठक में मंजूरी मिल गई है। 

टेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे प्रबंधन का तर्क
टेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे प्रबंधन का तर्क है कि 2001 से लेकर अब तक टेस्टों के रेट नहीं बढ़ाए हैं। टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली किट, रिजेंटस और केमिकल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 

इन टेस्ट की बढ़ी हैं दरें
अस्पताल में 5 रुपये में होने वाला एचबी का टेस्ट साढ़े पांच रुपये में होगा। कंप्लीट हीमोग्लोबिन टेस्ट 35 की जगह 38, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट 150 की जगह 165 रुपये, शुगर टेस्ट 20 की जगह 22 रुपये और यूरिया टेस्ट भी 20 की जगह 22 रुपये में किया जाएगा। इसी तरह अन्य टेस्ट के दामों में बढ़ोतरी होगी।

शिक्षा मंत्री भारद्वाज बैठक में आधा घंटा देरी से पहुंचे

IGMC rogi kalyan samiti Meeting Big decisions in shimla
फाइल फोटो

रोगी कल्याण समिति की बैठक में जहां स्वास्थ्य मंत्री पंद्रह मिनट देरी से पहुंचे वहीं शिक्षा मंत्री आधा घंटा लेट आए। बैठक को कॉलेज प्राचार्य डॉ. मुकंद लाल शुरू करने वाले थे लेकिन स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने उन्हें रोक लिया और कहा कि शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को आने दें। शिक्षा मंत्री साढ़े ग्यारह बजे के बाद बैठक में पहुंचे। 

सूत्रों का कहना है कि पहले तो शिक्षा मंत्री ने बैठक में आने से ही मना कर दिया था लेकिन स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार के आग्रह के बाद वह बैठक में आए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि मंत्री अस्पताल प्रबंधन से नाराज चल रहे हैं। इसकी वजह से उन्होंने बैठक में आने को लेकर सहमति नहीं दी थी। बैठक में उन्होंने अस्पताल में चल रहे कार्यों को लेकर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किए।

उन्होंने डॉक्टरों की पार्किंग में इमरजेंसी में आने वाले दो वाहनों को खडे़ करने की इजाजत देने की वकालत की। बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. रविचंद शर्मा, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज, केएनएच की एमएस डॉ. अंबिका चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. नीरज मित्तल, एसीएफ प्रणव नेगी, कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष सुखदेव वर्मा, रीटा चौहान, सदस्य मदन शर्मा, कपिल महाशय और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
 
सबसे देरी से पहुंचे विशेष सचिव स्वास्थ्य 
शिमला। आईजीएमसी में हुई आरकेएस की बैठक में विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. निपुण जिंदल सबसे देरी से पहुंचे। जिंदल, शिक्षा मंत्री के भी बाद बैठक में पहुंचे। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य (हेल्थ) को न देखकर पूछा कि वह क्यों नहीं आए। कहा कि अगर वह नहीं आ पाए तो नॉमिनी के बारे में कमेटी को अवगत करवा देते। 

ओपीडी ब्लॉक का लिया फीडबैक
अस्पताल में बैठक से पहले स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने न्यू ओपीडी ब्लॉक को लेकर लोक निर्माण विभाग से जानकारी ली। अस्पताल प्रबंधन ने बताया गया कि भवन का निर्माण कार्य (सिविल वर्क) अस्सी फीसदी तक पूरा हो चुका है। लेकिन ब्लॉक में लिफ्ट न लगने और भवन पर आ रहे अतिरिक्त खर्चे को लेकर जानकारी दी।

शिक्षा मंत्री को मंगवाई नई कुर्सी 
कमेटी रूम में स्वास्थ्य मंत्री पहुंच गए थे। इस बीच उन्होंने अपने लिए लग्जरी चेयर देखी। इसके बाद मंत्री ने शिक्षा मंत्री के लिए भी इसी तरह की कुर्सी लाने को कहा। प्रबंधन ने इस पर तुरंत नई कुर्सी का इंतजाम किया। हालांकि इस तरह के कार्य करने को लेकर प्रबंधन की खूब किरकिरी भी हुई। 

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