{"_id":"571bbb324f1c1b967f8b497c","slug":"igmc-doctors-done-sucessfull-operation-of-gilld-disease-patient","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईजीएमसी के डॉक्टरों ने ढाई घंटे में निकाला 4 किलो का गिल्लड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईजीएमसी के डॉक्टरों ने ढाई घंटे में निकाला 4 किलो का गिल्लड़
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:09 AM IST
विज्ञापन
सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने विश्व के दूसरे सबसे बड़े गिल्लड़ रोग के ऑपरेशन का दावा किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईजीएमसी शिमला के डाक्टरों ने गिल्लड़ रोग (घेंघे) का सफल ऑपरेशन किया है। पीड़ित व्यक्ति के गले और छाती के बीच चार किलो का गिल्लड़ चालीस वर्षों से बढ़ रहा था। आईजीएमसी में उपचार के लिए पहुंचे बुजुर्ग का डाक्टरों ने ढाई घंटे तक ऑपरेशन किया।
विज्ञापन
सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने विश्व के दूसरे सबसे बड़े गिल्लड़ रोग के ऑपरेशन का दावा किया है। बीते वर्ष एम्स में 2.9 किलो के घेंघे रोग का ऑपरेशन छह घंटों में किया गया था। सर्जरी के प्रोफेसर डा. अनिल मल्होत्रा ने बताया कि झारखंड निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग घेंघा रोग से पीड़ित था।
विज्ञापन
उनकी टीम ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। पीड़ित के गले में जख्म बढ़ने लगे थे और खाना खाने के दौरान काफी दर्द झेलनी पड़ रही थी। इस तरह के ऑपरेशन करने में व्यक्ति की लाइफ रिस्क काफी ज्यादा होती है। गिल्लड़ रोग होने से खून की नसें फूल जाती हैं और टेढ़ी मेढ़ी हो जाती हैं।
विज्ञापन
बीस अप्रैल को अस्पताल में ऑपरेशन किया गया और मौजूदा समय में पीड़ित सर्जरी वार्ड के यूनिट टू के बेड नंबर तीन में उपचाराधीन है। उसे अब किसी भी तरह का खतरा नहीं है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें। मल्होत्रा ने कहा कि गिल्लड़ को जांच के लिए भेजेंगे।
यह थी ओटी की टीम
प्रोफेसर अनिल मल्होत्रा, प्रोफेसर आरएस जोबटा, डा. अशोक कौंडल, डा. गोपाल सिंह एवं एनेस्थीसिया टीम से एसएस सोढी, डा. दारा सिंह, डा. कार्तिक स्याल और असिस्टेंट स्टाफ वेजंती और ओटीए रीना ने सहयोग दिया।