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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   If the Gram Panchayats do not give NOC to the power project on time, then it will be considered approved

हिमाचल: ग्राम पंचायतों ने तय समय पर बिजली परियोजना को एनओसी नहीं दी तो उसे माना जाएगा स्वीकृत

Sat, 03 Jun 2023 09:50 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Jun 2023 09:50 PM IST
सार

 राज्य सचिवालय में इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईपीपी) के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने वाटर सेस की मात्रा निर्धारित करने को एसोसिएशन से प्रस्ताव भी मांगा। 

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If the Gram Panchayats do not give NOC to the power project on time, then it will be considered approved
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आईपीपी के साथ बैठक की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अब बिजली परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए ग्राम पंचायतों ने तय समय पर एनओसी नहीं दी तो उसे स्वीकृत माना जाएगा। शनिवार को राज्य सचिवालय में इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईपीपी) के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह बड़ा फैसला लिया। उन्होंने वाटर सेस की मात्रा निर्धारित करने को एसोसिएशन से प्रस्ताव भी मांगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रदेश में ओपन हाइड्रो पॉलिसी लाने का एलान भी किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं को दूर कर उनकी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनकी विद्युत परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए सभी मंजूरियां प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के अलावा जल विद्युत क्षेत्र प्रदेश के राजस्व का मुख्य स्रोत है। सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जल उपकर अधिनियम पारित किया है। उन्होंने अधिनियम को लागू करने के लिए जल उपकर की मात्रा पर आईपीपी से प्रस्ताव मांगा और कहा कि सरकार उनके प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित विद्युत परियोजनाओं खासकर अपना खर्च पूर्ण करने वाली परियोजनाओं में रॉयल्टी बढ़ाने का मुद्दा भी उठा रही है।
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आईपीपी की मांग पर मुख्यमंत्री ने एचपीपीटीसीएल को विद्युत पारेषण लाइन (पावर ट्रांसमिशन लाइन) बिछाने में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि उत्पादन स्थलों से विद्युत की आपूर्ति समयबद्ध की जा सके और विद्युत उत्पादकों को वित्तीय नुकसान का सामना न करना पड़े। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार 41 विद्युत परियोजनाओं के लिए विद्युत खरीद समझौते की तारीख के बजाय वाणिज्यिक संचालन की तारीख से बिजली दरों की गणना के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगी। सरकार हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को भी वास्तविक आधार पर रॉयल्टी यानी 12, 18 और 30 प्रतिशत पर विचार करने के लिए परामर्श देगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि 111 मिनी और माइक्रो ऊर्जा परियोजनाएं राज्य के खजाने में 223.60 करोड़ रुपये का योगदान कर रही हैं। उन्होंने आईपीपी से कहा कि वे अपनी विद्युत परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें ताकि इन परियोजनाओं का लाभ जल्द से जल्द उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि आईपीपी के माध्यम से 3539 मेगावॉट विद्युत उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से अभी तक केवल 754 मेगावॉट का दोहन किया जा सका है। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक चंद्रशेखर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव जल शक्ति अमिताभ अवस्थी, प्रबंध निदेशक हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड ऋग्वेद ठाकुर, निदेशक ऊर्जा हरिकेश मीणा भी मौजूद रहे।

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