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अमेरिकी रसायन के छिड़काव से सेब की अंधाधुंध ड्रॉपिंग, बागवानों की चिंता बढ़ी

Thu, 23 May 2019 07:01 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 23 May 2019 07:01 AM IST
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huge dropping of apples due to sprayof american chemicals in himachal
- फोटो : अमर उजाला

अमेरिका रसायन के छिड़काव से सेब की अंधाधुंध ड्रॉपिंग से बागवान चिंता में फंस गए हैं। बागवानों को सब्जबाग दिखाए गए थे कि इस रसायन के इस्तेमाल से सेब का आकार अच्छा होगा और हर फूल में सेब लगेगा।

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बागवानों ने अपनी जेब ढीली कर इसका इस्तेमाल तो कर लिया, लेकिन इस विदेशी रसायन के कारण सेब की फसल जमीन पर बिछ गई। कई बगीचों में तो 75 फीसदी ड्रॉपिंग हुई है। 
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इस रयायन के बारे में बताया गया था कि यह रसायन हर फूल को फल में सेट तो कर देता है, लेकिन फल पेड़ों में ज्यादा देर तक नहीं टिक पा रहे। आमतौर पर सेब की ड्रॉपिंग जून में होती है, लेकिन इस बार तो मई में ही हो रही है।
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दवा विक्रेताओं ने भी इस दवा की अंधाधुंध बिक्री की है, जबकि इस रसायन के छिड़काव को बागवानी विश्वविद्यालय की मंजूरी भी नहीं है। हिमाचल में सेब बगीचों में ड्रॉपिंग का कारण रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करना ज्यादा माना जा रहा है। बाकी नमी और ठंड का घटते-बढ़ते रहना और बागवानी के अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाना भी है।

विशेषज्ञ बोले, सेटिंग के वक्त का छिड़काव भी जिम्मेदार

प्रदेश के शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों के सेब बागवानीयुक्त कई क्षेत्रों में सेब की ड्रॉपिंग की समस्या सामने आई है। कोटखाई तहसील के बखोल पंचायत के बागवान संजीव चौहान कहते हैं कि जब सेब के फलों में बीज कम या कमजोर होते हैं और तापमान कम रहता है, ऐसे में फल झड़ने लगते हैं।  ठियोग क्षेत्र के एक अन्य बागवान सन्नी शर्मा ने बताया कि उनके बगीचे में ड्रॉपिंग का कारण अमेरिका से आए एक महंगे रसायन की ओवरडोज से हुई है। 

डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि के सेवानिवृत्त प्रसार निदेशक बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि बागवान सेब की सेटिंग के लिए बिना ज्ञान के  दवाओं का स्प्रे सेटिंग के लिए करते हैं। इसका रिएक्शन होता है और सेब झड़ने लगता है। फलों की छंटाई पहले ही कर लें तो ड्रॉपिंग की समस्या नहीं रहती। 

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