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Shimla News: शहर में जाम से एचआरटीसी को 4 दिन में तीन लाख का नुकसान
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रूट फेल होने और बसों के देरी से पहुंचने के कारण लग रही चपत, आधे घंटे के रूट पर लग रहा तीन गुना समय
जाम लगने से जनता भी झेल रही है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में लगने वाले यातायात जाम से हजारों लोग जूझने को मजबूर हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम को शहर में घंटों लगने वाले जाम से भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।
एचआरटीसी शिमला डिपो के आकलन के मुताबिक ट्रैफिक जाम के कारण उन्हें हर रोज करीब 35,000 रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। एचआरटीसी ने 21 से 24 जून तक शहर में चलने वाली बसों से होने वाली कमाई का ब्योरा जुटाया तो पता चला कि ट्रैफिक जाम के कारण रूट फेल होने और बसों के देरी से गंतव्य तक पहुंचने से चार दिन में करीब 3 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। इसमें 21 जून को सबसे अधिक एक दिन में 1.63 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
एचआरटीसी ने पिछले साल इन्हीं दिनों में होने वाली कमाई को आधार मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। एचआरटीसी के शिमला डिपो को सामान्य दिनों में 9 से 9.50 लाख रुपये किराया एकत्रित होता है। बसों के रूटों पर अधिक समय लगने से निगम को चालक-परिचालकों को ओवरटाइम अधिक देना पड़ा है। बसों की बात करें तो शिमला लोक डिपो के शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़कर करीब 198 रूट हैं। इसमें करीब 600 ट्रिप होते हैं। शहर में पिछले दिनों में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण हर रोज सात से आठ रूट फेल हो रहे थे, वहीं ज्यादातर रूटों पर एचआरटीसी की बसें करीब पौने घंटे तक देरी से पहुंच रही थीं। यही नहीं आधे घंटे के समय वाले रूट में जाम के कारण बसों को डेढ़ घंटे का समय लग रहा था। इसमें बसों के डीजल का खर्चा अधिक और कमाई कम हो रही थी। आरएम शिमला विनोद कुमार ने बताया कि पिछले दिनों शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण एचआरटीसी को वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। इसके बावजूद लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए निगम प्रयासरत हैं।
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25,00 रुपये प्रति निजी बस हो रहा घाटा
शिमला शहर में करीब 106 निजी बसें चलती हैं, जिनमें हर रोज हजारों लोग सफर करते हैं। शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण एचआरटीसी की तरह निजी बस ऑपरेटरों को भी घाटा उठाना पड़ा है। ऑपरेटरों के मुताबिक आम दिनों में उन्हें करीब 75,00 से 8,000 रुपये किराये से प्राप्त होते हैं, वहीं पिछले दिनों लगने वाले जाम से निजी बस ऑपरेटरों को महज 45,00 से 5,000 रुपये ही किराये से प्राप्त हो रहे थे। इसकी मुख्य वजह यह थी कि जाम के कारण कई रूट मिस हो रहे थे, जिससे बसों को समय की बाध्यता के कारण आधे रूट से वापिस जाना पड़ रहा था। शिमला सिटी बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव प्रवीण चौहान के मुताबिक टूरिस्ट सीजन में उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है। जाम के कारण बसों में तकनीकी खराबी अधिक आती है। उन्होंने बताया कि कमाई कम होने से डीजल का खर्चा, चालक-परिचालक का वेतन और विभिन्न प्रकार के टैक्स का भुगतान करना भी मुश्किल हो जाता है।
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जाम लगने से जनता भी झेल रही है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में लगने वाले यातायात जाम से हजारों लोग जूझने को मजबूर हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम को शहर में घंटों लगने वाले जाम से भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।
एचआरटीसी शिमला डिपो के आकलन के मुताबिक ट्रैफिक जाम के कारण उन्हें हर रोज करीब 35,000 रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। एचआरटीसी ने 21 से 24 जून तक शहर में चलने वाली बसों से होने वाली कमाई का ब्योरा जुटाया तो पता चला कि ट्रैफिक जाम के कारण रूट फेल होने और बसों के देरी से गंतव्य तक पहुंचने से चार दिन में करीब 3 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। इसमें 21 जून को सबसे अधिक एक दिन में 1.63 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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एचआरटीसी ने पिछले साल इन्हीं दिनों में होने वाली कमाई को आधार मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। एचआरटीसी के शिमला डिपो को सामान्य दिनों में 9 से 9.50 लाख रुपये किराया एकत्रित होता है। बसों के रूटों पर अधिक समय लगने से निगम को चालक-परिचालकों को ओवरटाइम अधिक देना पड़ा है। बसों की बात करें तो शिमला लोक डिपो के शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़कर करीब 198 रूट हैं। इसमें करीब 600 ट्रिप होते हैं। शहर में पिछले दिनों में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण हर रोज सात से आठ रूट फेल हो रहे थे, वहीं ज्यादातर रूटों पर एचआरटीसी की बसें करीब पौने घंटे तक देरी से पहुंच रही थीं। यही नहीं आधे घंटे के समय वाले रूट में जाम के कारण बसों को डेढ़ घंटे का समय लग रहा था। इसमें बसों के डीजल का खर्चा अधिक और कमाई कम हो रही थी। आरएम शिमला विनोद कुमार ने बताया कि पिछले दिनों शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण एचआरटीसी को वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। इसके बावजूद लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए निगम प्रयासरत हैं।
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25,00 रुपये प्रति निजी बस हो रहा घाटा
शिमला शहर में करीब 106 निजी बसें चलती हैं, जिनमें हर रोज हजारों लोग सफर करते हैं। शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण एचआरटीसी की तरह निजी बस ऑपरेटरों को भी घाटा उठाना पड़ा है। ऑपरेटरों के मुताबिक आम दिनों में उन्हें करीब 75,00 से 8,000 रुपये किराये से प्राप्त होते हैं, वहीं पिछले दिनों लगने वाले जाम से निजी बस ऑपरेटरों को महज 45,00 से 5,000 रुपये ही किराये से प्राप्त हो रहे थे। इसकी मुख्य वजह यह थी कि जाम के कारण कई रूट मिस हो रहे थे, जिससे बसों को समय की बाध्यता के कारण आधे रूट से वापिस जाना पड़ रहा था। शिमला सिटी बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव प्रवीण चौहान के मुताबिक टूरिस्ट सीजन में उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है। जाम के कारण बसों में तकनीकी खराबी अधिक आती है। उन्होंने बताया कि कमाई कम होने से डीजल का खर्चा, चालक-परिचालक का वेतन और विभिन्न प्रकार के टैक्स का भुगतान करना भी मुश्किल हो जाता है।