HPU Shimla: एचपीयू में परीक्षा के बाद ही मिलेगा अब पीएचडी में प्रवेश
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व में रहे कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार, यूआईटी के निदेशक प्रो. पीएल शर्मा और एक अन्य अधिकारी के बच्चों को बिना प्रवेश परीक्षा के सीधे पीएचडी में प्रवेश दिए जाने पर बीते सत्र में बवाल हुआ था।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) अब यूजीसी के तय नियमों के तहत ही परीक्षा के बाद पीएचडी में प्रवेश देगा। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए रखी गई सुपरन्यूमरी सीट और यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रिएट की गईं सीटों के लिए भी प्रवेश परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। प्रवेश में यूजीसी के नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इससे एचपीयू में बिना प्रवेश परीक्षा शिक्षकों और अधिकारियों के बच्चों को सीधे दिए गए प्रवेश जैसे विवाद फिर खड़े नहीं होंगे।
ये सभी फैसले डीन कमेटी की स्टैंडिंग काउंसिल की मंगलवार को अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. कुलभूषण चंदेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए हैं। बैठक में विश्वविद्यालय में महापुरुषों के नाम पर संचालित की जा रही चेयर (पीठों) को एक दर्शन शास्त्र विभाग के अधीन लाने की संभावनाओं को तलाशने के लिए कमेटी का गठन किया गया।
इसके आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा। स्टैंडिंग कमेटी ने सत्र 2022-23 से ही स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) को लागू करने की स्वीकृति दी है। फिलहाल पीजी कोर्स में इसे लागू नहीं किया जाएगा। इसके लिए अधिष्ठाता अध्ययन ने एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
यह कमेटी पीजी कोर्स में किस हद तक दूसरे संकाय के विषयों को पढ़ने की च्वाइस दी जा सकती है, इसकी जानकारी जुटाएगी। इसके आधार पर ही तय होगा कि पीजी कोर्स के छात्रों को अलग विषय चुनने की किस हद तक च्वाइस दी जा सकती है। बैठक में लाइफ लांग लर्निंग में पीएचडी शुरू करने के मामले पर भी कमेटी का गठन किया गया है।
बिना परीक्षा के प्रवेश देने पर हुआ था बवाल
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व में रहे कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार, यूआईटी के निदेशक प्रो. पीएल शर्मा और एक अन्य अधिकारी के बच्चों को बिना प्रवेश परीक्षा के सीधे पीएचडी में प्रवेश दिए जाने पर बीते सत्र में बवाल हुआ था। यूजीसी के पीएचडी में प्रवेश के लिए तय नियमों की अनदेखी किए जाने पर छात्र संगठन एसएफआई लगातार प्रवेश को रद्द करने की मांग पर अड़ी हुई है। विवि और कॉलेजों के बिना प्रवेश परीक्षा के पीएचडी में पूर्व में दिए गए प्रवेश को रद्द किए जाने की मांग लगातार उठ रही है।