एमए अंग्रेजी के पेपर में कई विद्यार्थियों को दे दिए शून्य अंक
मास्टर डिग्री...। यानी किसी विषय में महारथ। लेकिन, यहां महारथ हासिल करने से पहले ही छात्रों के दूसरे महारथियों ने पसीने छुड़ा दिए। एमए अंग्रेजी के थर्ड सेमेस्टर के तीसरे पेपर (एमईजी303) में प्रदेश विश्वविद्यालय ने दर्जनों छात्रों को फेल कर दिया। हालांकि, किसी विषय में फेल होना अलग बात है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीसरे पेपर में शून्य अंक दर्शा दिए हैं। यह बात अब छात्रों के गले नहीं उतर रही है।
छात्रों का कहना है कि फेल होने का अर्थ है कि विषय में कम अंक आना। जब बात शून्य की हो तो मास्टर डिग्री कर रहे छात्रों की ओर से सवाल उठाना भी लाजिमी है। ऐसा मामला सिरमौर के पीजी कॉलेज का ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य कॉलेजों में भी कई छात्रों के अंक शून्य दर्शाए गए हैं। डॉ. वाईएस परमार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन के छह रेगुलर विद्यार्थियों के अलावा पांच प्राइवेट छात्र ऐसे हैं, जिनके अंक शून्य आए हैं।
छात्रों ने दिसंबर में अंग्रेजी विषय के थर्ड सेमेस्टर के तीसरे पेपर ड्रामा की परीक्षा दी थी। छात्रों को समझ नहीं आ रहा है कि उनके अंक शून्य किस आधार पर दर्शा दिए गए। रेगुलर छात्रों के परिणामों के आगे असेसमेंट के अंक भी दिए गए हैं, लेकिन परीक्षा में शून्य अंक दर्शाने के बाद असेसमेंट के अंक भी नहीं जोड़े जा सकते।
तीसरे पेपर में शून्य वाले छात्र इसी सेमेस्टर के पहले दो पेपर और चौथे पेपर में अच्छे अंकों से पास हुए हैं। सेमेस्टर के सभी पेपरों में पास छात्रों को शून्य अंक देना पेपर जांचने वाले प्राध्यापकों की कार्यप्रणाली पर सवाल है। छात्रों ने बताया कि पेपर में फेल ही करना था तो शून्य न देकर एक से 25 अंक के बीच कोई न कोई अंक जरूर मिलते।
शून्य अंक वाले छात्रों को पुनर्मूल्यांकन कराना होगा। नाहन ही नहीं, अन्य कालेजों में भी छात्रों के शून्य अंक आए हैं। इसकी जांच की जाएगी। पेपर जांचने वाले प्राध्यापकों को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। पेपर की जांच बाहर से करवाई जाती है। पेपर जांच के लिए कहां गया, इसकी जानकारी विवि प्रशासन को भी नहीं होती। - डॉ. जेएस नेगी, परीक्षा नियंत्रक, एचपीयू