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अरे वाह! प्लास्टिक की खाली बोतलों, पुराने खिलौनों से बनेगा पेंट

Fri, 01 Dec 2017 02:29 PM IST
राकेश भारद्वाज/अमर उजाला, धर्मशाला
राकेश भारद्वाज/अमर उजाला, धर्मशाला Updated Fri, 01 Dec 2017 02:29 PM IST
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HPCU professor deepak pant made paint from plastic bottles

प्लास्टिक की खाली बोतलों, पुराने खिलौनों और प्लास्टिक से बनी टूटी-फूटी चीजों को पिघलाकर पेंट तैयार होगा। पेंट बनाने के लिए बेकार सीडी और बाल्टी-टब के अलावा वेस्ट प्लास्टिक का इस्तेमाल होगा। इस पेंट को लकड़ी, लोहे और दीवार में कहीं भी किया जा सकेगा।

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इसका इंसानों के स्वास्थ्य के पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा। बाजार से मिलने वाले पेंट के मुकाबले यह सस्ता भी होगा। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के डीन डॉ. दीपक पंत ने वेस्ट प्लास्टिक से पेंट बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है।
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इसके तहत एक किलो प्लास्टिक से एक लीटर तक पेंट तैयार किया जा सकेगा। डॉ. पंत का कहना है कि यह प्रोजेक्ट लेबोरेटरी से इंडस्ट्री तक पहुंचता है तो इससे आम लोगों को तो फायदा होगा ही पर्यावरण को प्रभावित करने वाले वेस्ट प्लास्टिक का भी सदुपयोग हो सकेगा।

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प्लास्टिक को क्रश करके किया जाता है गर्म

HPCU professor deepak pant made paint from plastic bottles
सीयू के प्रोफेसर डॉ.दीपक पंत - फोटो : अमर उजाला

यूं तो प्लास्टिक के कई प्रकार होते हैं, लेकिन पेंट बनाने के लिए पॉली कार्बोनेट प्लास्टिक चाहिए। प्लास्टिक को क्रश करके उसे गर्म किया जाता है। इसके बाद जिस भी रंग का पेंट चाहिए। उस रंग के अनुसार वेस्ट प्लास्टिक को रंग दिया जाता है।

लकड़ी, लोहा, बाहरी दीवारों के लिए ज्यादा लाभकारी
अभी तक लकड़ी, लोहा और बाहरी दीवारों पर प्रयोग किए जाने वाले पेंट के ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं आए हैं। इन पर किया पेंट शीघ्र खराब हो जाता है। लकड़ी और लोहे पर बिना प्राइमर के पेंट नहीं चढ़ाया जा सकता है।

वेस्ट प्लास्टिक से तैयार होने वाला पेंट लकड़ी और लोहे पर बिना प्राइमर के चढ़ाया जा सकेगा। बाहर की दीवारों पर भी यह ज्यादा समय तक टिका रहेगा।

डॉ. पंत ने पेंट को लकड़ी पर प्रयोग किया है। करीब नौ माह से लकड़ी को धूप पर रखा जा रहा है, लेकिन अभी तक वह पेंट खराब नहीं हुआ है।

वेस्ट प्लास्टिक से एलपीजी बनाने पर मिला राष्ट्रपति अवार्ड

HPCU professor deepak pant made paint from plastic bottles

डॉ. पंत ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम देहरादून से 2002 में पीएचडी की। इसके बाद रॉयलखंड यूनिवर्सिटी और एमएनवी गढ़वाल में सेवाएं देने के बाद 2012 में हिमाचल में सीयू को ज्वाइन किया।

डॉ. पंत ने पिथौरागढ़ से स्कूली पढ़ाई की। डॉ. पंत को वेस्ट प्लास्टिक से एलपीजी गैस बनाने के लिए राष्ट्रपति से अवार्ड मिल चुका है।

स्टेट इनोवेशन अवार्ड को भेजा है प्रोजेक्ट 
वेस्ट प्लास्टिक से पेंट बनाने के प्रोजेक्ट को लेबोरेटरी से इंडस्ट्री तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही प्रोजेक्ट को एचपी स्टेट इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा है। - डॉ दीपक पंत, डीन पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग केंद्रीय विवि

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