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HP Panchayat Election: पंचायत चुनाव समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Wed, 07 Jan 2026 04:31 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 07 Jan 2026 04:31 PM IST
सार

 पंचायत चुनाव समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर राज्य सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा। 

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HP Panchayat Election case update: govt present its side in the High Court today
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायती चुनाव को समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट अब इस पर बहुत जल्द अपना फैसला देगा। बुधवार को सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने पंचायती राज चुनाव को समय पर न करवाने पर अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार पर चुनाव को टालने के आरोप लगाए जा रहे हैं वह निराधार हैं। सरकार की चुनाव करवाने को लेकर मंशा साफ है लेकिन क्योंकि प्रदेश में नई पंचायतें, ग्राम समितियां और जिला परिषदों के गठन की प्रक्रिया जारी है।

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कानून की प्रक्रिया को मध्य नजर रखते हुए चुनाव करवाने में अभी और 6 महीना का वक्त लगेगा। अगर आज की तारीख में आरक्षण रोस्टर भी जारी कर दिया जाता है तब भी चुनाव करवाने में कम से कम 90 दोनों का वक्त लगेगा। वहीं, राज्य चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि चुनाव करवाने में आगे और दिक्कतें होंगी। फरवरी और मार्च के महीने में प्रदेश में चुनाव करवाना संभव नहीं है। इस दौरान बच्चों की परीक्षाएं शुरू हो जाती है और कर्मचारी परीक्षाओं में व्यस्त रहते हैं। मई के बाद कर्मचारी जनगणना की ड्यूटी में तैनात किए जाएंगे और जुलाई और अगस्त के महीने में प्रदेश में भारी वर्षा शुरू हो जाती है।

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वहीं, दूसरी ओर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि पंचायत चुनाव को जानबूझकर समय पर नहीं करवाया जा रहा है। सरकार को परिसीमाओं के गठन के लिए पिछले 1 साल का समय था लेकिन सरकार आपदा का रोना रोती रही। उन्होंने अदालत से मांग की है सरकार जो नई परिसीमा का गठन कर रही है वह भविष्य के लिए हो और वर्तमान में पुरानी जनगणना के आधार पर पंचायती चुनाव सुनिश्चित कराएं जाए। दलीलें दी गई कि सरकारी मशीनरी चुनाव करवाने में पूरी तरह से फेल हो गई है। पंचायती चुनाव एक संवैधानिक संस्था है जिसके तहत चुनाव की अवधि समाप्त होने के 6 महीने के भीतर फिर से चुनाव करवाना अनिवार्य है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि पंचायती चुनाव को समय पर करवाएं।इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ कर रही है।

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