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HP Horticulture: उजड़ चुके 93 सरकारी बगीचों में फलों की नई प्रजातियों से हरियाली लाने की तैयार

Wed, 29 Jan 2025 11:56 AM IST
Krishan Singh धर्म सिंह तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)
धर्म सिंह तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 29 Jan 2025 11:56 AM IST
सार

 बागवानों की सुविधा के लिए स्थापित 93 प्रॉजिनी कम डेमोस्ट्रेशन ऑर्चड्स (पीसीडीओ) उजड़ चुके हैं। अब इनको रि-मॉडल करने की तैयारी है। 

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HP Horticulture: Preparations are on to bring greenery to the 93 ruined govt orchards with new varieties of fr
नाहन के शिरुमाईला में सरकारी बगीचा। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बागवानों की सुविधा के लिए स्थापित 93 प्रॉजिनी कम डेमोस्ट्रेशन ऑर्चड्स (पीसीडीओ) उजड़ चुके हैं। अब इनको रि-मॉडल करने की तैयारी है। इसको लेकर विभाग ने सभी बगीचों से नए प्लान मांगे हैं। बागवानों की सुविधा को लेकर हर जिला में  सरकार ने डेमोस्ट्रेशन बगीचों का निर्माण किया है। इन बगीचों में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या कामगारों और स्टाफ की है।

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अब सरकार इन बगीचों को रि-मॉडल करने की ओर कदम बढ़ा रही है। इसको लेकर बगीचों से प्लानन मांगे हैं। बगीचों में ऐसे फल लगाने की योजना तैयार की जा रही है जिनकी मांग भी अधिक है और  उनके हर मौसम में दाम भी अच्छे मिलते हैं। इसमें खासकर ड्रेगनफूट, एवाकाडो, अच्छी किस्म के अमरूद सहित अन्य कई फल शामिल हैं। हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार का सपना था कि गांव में किसानों की आर्थिक स्थित्ति इतनी मजबूत की जाए कि उन्हें दूसरे शहरों में न जाना पड़े।

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सिरमौर में सबसे ज्यादा 15 बगीचे
विभाग के अनुसार सबसे अधिक पीसीडीओ सिरमौर जिला में हैं। यहां 15 बगीचे हैं। इसके बाद शिमला में 14, चंबा में 12, मंडी में 11, सोलन में 10, किन्नौर में 8, बिलासपुर, कांगड़ा में 6, हमीरपुर में 4, कुल्लू में 3, ऊना और लाहौल-स्पीति में 2 बगीचे शामिल हैं। इन बगीचों में बागवानों को ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्नत किस्म के फलदार पौधे बहुत कम दामों पर उपलब्ध करवाए जाते हैं। इसके अलावा यहां पौधों को तैयार भी किया जाता है।

मजदूरों की कमी भी की जाएगी दूर
प्रदेश सरकार की तरफ से समय-समय पर पीसीडीओ को लेकर योजनाएं चलाई जाती हैं ताकि बागवानों को बेहतर सुविधा मिल सकें। जैसे ही नई भर्तियां होंगी कामगारों की तैनाती कर दी जाएगी।-विनय सिंह, निदेशक बागवानी विभाग

डॉ. परमार का सपना रहा है कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को सुद्ध किया जाए ताकि उन्हें काम की तलाश में शहरों का रुख न करना पड़े। इस दिशा में डेभोस्टेशन बगीचे तैयार किए थे। इनमें से कुछ बंद कर दिए। शेष की हालत भी छिपी नहीं है। -कुश परपार, पूर्व विधायक हम

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