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HP High Court: केंद्र सरकार के उपक्रमों, निजी विद्युत कंपनियों की याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई
Wed, 24 May 2023 06:58 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 24 May 2023 06:58 PM IST
सार
प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत सरकार के उपक्रमों और निजी विद्युत कंपनियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई निर्धारित की है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों ही कंपनियों ने हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम को चुनौती दी है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत सरकार के उपक्रमों और निजी विद्युत कंपनियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई निर्धारित की है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों ही कंपनियों ने हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम को चुनौती दी है। दोनों ने ही अधिनियम को असांविधानिक करार दिए जाने की गुहार लगाई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने इन मामलों की सुनवाई 30 मई निर्धारित की है। एनटीपीसी, बीबीएमबी, एनएचपीसी और एसजेवीएनएल ने दलील दी है कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ अनुबंध के आधार पर कंपनियां राज्य को 12 से 15 फीसदी बिजली मुफ्त देती हैं।
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इस स्थिति में हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम के तहत कंपनियों से सेस वसूलने का प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं है। अदालत को बताया गया कि 25 अप्रैल 2023 को भारत सरकार ने पाया कि कुछ राज्यों में भारत सरकार के उपक्रमों से सेस वसूला जा रहा है। भारत सरकार ने राज्य के सभी मुख्य सचिवों को हिदायत दी थी कि भारत सरकार के उपक्रमों से वाटर सेस न वसूला जाए। आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद भी राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों की अनुपालना नहीं कर रही है। इससे पहले प्रदेश में निजी जल विद्युत कंपनियों ने भी हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम को चुनौती दी है। निजी जल विद्युत कंपनियों ने आरोप लगाया गया है कि पनबिजली परियोजना पर वाटर सेस लगाया जाना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
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