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Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- दिव्यांग कर्मियों को नियमित नियुक्ति देने पर विचार करे सरकार

Tue, 12 May 2026 10:50 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 12 May 2026 10:50 AM IST
सार

दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे कर्मचारियों के हक में हिमाचल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के दावों पर 30 जून 2026 तक नया और तर्कसंगत आदेश पारित करें। पढ़ें पूरी खबर...

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HP High Court Says Government Should Consider Granting Regular Appointments to Employees with Disabilities
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकार को इन कर्मचारियों के दावों पर कानूनी प्रावधानों और पूर्व के अदालती फैसलों के आलोक में पुनर्विचार करना होगा।

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सरकार ने हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 का हवाला देकर कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावों को खारिज कर दिया था। हालांकि, अदालत ने इस अधिनियम को पहले ही असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि चूंकि संबंधित अधिनियम अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए इसके आधार पर खारिज किए गए सभी आदेश भी रद्द माने जाएंगे। कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के दावों पर 30 जून 2026 तक नया और तर्कसंगत आदेश पारित करें। 
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इस प्रक्रिया में प्रभावित कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के पुराने फैसलों के अनुसार वे अपनी नियुक्ति की प्रारंभिक तिथि से ही नियमित नियुक्ति के पात्र हैं। सरकार ने 2024 के नए सेवा अधिनियम का सहारा लेकर उनकी मांगें ठुकरा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि इस फैसले के बाद भी कर्मचारियों की कोई शिकायत रहती है, तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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पंचायत चुनाव में नामांकन रद्द होने की आशंका पर दायर दो याचिकाएं खारिज
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता महिलाओं को आशंका है कि उनका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। याचिकाओं में बताया गया है कि प्रदेश सरकार ने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया है। इसके तहत यदि किसी उम्मीदवार के ससुर, सास या पति ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, तो बहू पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है।

यह नियम मई 2026 की नामांकन प्रक्रिया से ठीक पहले लागू किया गया था। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभी तक न तो नामांकन पत्र रद्द हुए हैं और न ही अधिकारियों की ओर से कोई ऐसी कार्रवाई की गई है। यह याचिकाएं पूरी तरह से आशंकाओं पर आधारित है और समय से पहले दायर की गई है। यदि भविष्य में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या उनके अधिकारों का हनन होता है तो वह उचित कानूनी उपचार की मांग कर सकते हैं। अदालत में पहली याचिका मथुरा देवी पंचायत समिति सदस्य, ब्लॉक चुराग के लिए प्रत्याशी और दूसरी विद्या चौहान ग्राम पंचायत गुम्मा, कोटखाई की प्रधान पद प्रत्याशी ने दायर की है। 

पेटेंट उल्लंघन मामले में टेकफैब की अर्जी खारिज, जियोब्रग एजी के पक्ष में फैसला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टेकफैब इंडिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से दायर आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें स्विस कंपनी जियोब्रग एजी के पेटेंट उल्लंघन के मुकदमे को तकनीकी आधारों पर रद्द करने की मांग की गई थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि वादी का मुकदमा विचारणीय है और इसे शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। अब मुख्य मुकदमे और काउंटर क्लेम पर अगली सुनवाई 17 जून को होगी।

जियोब्रग एजी ने आरोप लगाया था कि टेकफैब इंडिया उसकी पेटेंटेड हाई-टेनसाइल स्टील वायर मेश तकनीक का उल्लंघन कर रही है। कंपनी का दावा है कि उनके पेटेंट (आईएन 448244 और आईएन454374) रॉकफॉल और भूस्खलन सुरक्षा प्रणालियों से संबंधित हैं, जिनकी नकल प्रतिवादी की ओर से जा रही है। प्रतिवादी का तर्क था कि कमर्शियल कोर्ट एक्ट की धारा 12 ए के तहत मुकदमे से पहले मध्यस्थता अनिवार्य है। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। टेकफैब का तर्क था कि सामान खरीदने वाली तीसरी कंपनी उर्बटेक को पक्षकार नहीं बनाया गया। 
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