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HP High Court: हाईकोर्ट ने कहा- आवेदन के समय अविवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र, जानें पूरा मामला

Sat, 25 Apr 2026 10:37 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sat, 25 Apr 2026 10:37 AM IST
सार

यदि कोई बेटी अपने पिता या माता की मृत्यु के बाद अविवाहित रहते हुए अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करती है, तो आवेदन के बाद और नियुक्ति मिलने से पहले उसकी शादी हो जाने से उसकी पात्रता खत्म नहीं होगी। ये कहना है हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का। जानें पूरा मामला...

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HP High Court Said Unmarried Daughter Eligible for Compassionate Appointment at the Time of Application
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि कोई बेटी अपने पिता या माता की मृत्यु के बाद अविवाहित रहते हुए अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करती है, तो आवेदन के बाद और नियुक्ति मिलने से पहले उसकी शादी हो जाने से उसकी पात्रता खत्म नहीं होगी।

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न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि किसी भी अभ्यर्थी की पात्रता उस तिथि से देखी जानी चाहिए, जब उसने पद के लिए आवेदन किया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि कोई बेटा आवेदन के बाद शादी कर लेता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द नहीं की जाती। ऐसे में बेटियों के साथ इस आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने विभाग के 19 सितंबर 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता की ज्वाइनिंग खारिज की गई थी।अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसकी मूल ज्वाइनिंग तिथि (सितंबर 2022) से ही दैनिक वेतनभोगी चपरासी माना जाए। उसे सभी परिणामी लाभ, वरिष्ठता और बकाया वेतन प्रदान किए जाएं। याचिकाकर्ता श्यामा कुमारी के पिता लोक निर्माण विभाग में चपरासी थे। उनकी जुलाई 2020 में मृत्यु हो गई थी।

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जून 2021 में श्यामा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। जुलाई 2021 में आवेदन करने के एक महीने बाद याचिकाकर्ता का विवाह हो गया। अगस्त 2022 में विभाग ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया, लेकिन उसमें शर्त रखी कि यदि महिला उम्मीदवार विवाहित पाई गई तो उसे कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जाएगा। सितंबर 2022 में जब उसने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, तो विभाग ने उनकी शादी की बात सामने आने पर उनकी ज्वाइनिंग को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्र दिया और वह अब पात्र नहीं है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आवेदन के समय वह वास्तव में अविवाहित थी, इसलिए प्रमाण पत्र सही था।
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